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फ़रवरी 2008

 

• कितना परिपक्व है हमारा गणतंत्र?

सचिन शर्मा

बुधवार, 15 अगस्त 2007 को भारत का 60वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। इस विषय पर तमाम प्रकार के आलेख-निबंध-समाचार-फी...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरे आलेख
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• मैं ने देखा, एक बूँद

अज्ञेय

मैं ने देखा एक बूँद सहसा उछली सागर के झाग से रंग गई क्षणभर, ढलते सूरज की आग से। मुझ को दीख गया: सूने विराट् के सम्‍मुख हर आलोक-छुआ अपनापन है उन्‍मोचन नश्‍वरता के दाग से! अज्ञेय   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: साहित्य
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• कितनी नावों में कितनी बार

अज्ञेय

कितनी नावों में कितनी बार कितनी दूरियों से कितनी बार कितनी डगमग नावों में बैठ कर मैं तुम्हारी ओर आया हूँ ओ मेरी छोटी-सी ज्योति ! कभी कुहासे में तुम्हें न देखता भी पर कुहासे की ही छोटी-सी रुपहली झलमल में पहचानता हुआ तुम्हारा ही प्रभा-मंडल । कितनी बार मैं, ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: साहित्य
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• गोरेपन और सफलता के बीच संबंध

गोरे रंग का भूत अभी तक हमारे सिर पर सवार है

आजकल टीवी पर एक विज्ञापन देख रहा हूं.....यह एक विज्ञापन नहीं बल्कि पूरे विज्ञापनों की एक सीरीज है......औरतों और मर्दों दोनों के लिए है......फेयर एंड लवली वालों ने बनाई है.....वे खुशखबरी दे रहे हैं कि अब वे मर्दों के लिए भी गोरेपन वाली क्रीम ले आए ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: विचार पृष्ठ
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• पहले भारत के परमाणु संयंत्र तो सुधरें

भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का काला सच (भाग-2)

http://hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0708/08/1070808138_1.htm   और पढ़ें...
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• परमाणु समझौते के पीछे का काला सच

- सचिन शर्मा

http://hindi.webdunia.com/samayik/article/article/0708/02/1070802049_1.htm   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरे आलेख
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• मिल सकती है बिजली समस्या से निजात

'डिस्ट्रिब्यूटेड जनरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी कॉन्सेप्ट' करेगा मदद

http://hindi.webdunia.com/news/news/national/0708/31/1070831028_1.htm   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरे आलेख
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• इतिहास की द्वन्द्वात्मक प्रक्रिया

हेगेल के विचार

विचारों और वस्तुओं की हर धारणा व अवस्था अपने विपरीत की दिशा में बढ़ती है और एक उच्चतर और जटिलतर इकाई बनाने के लिए उस विपरीत के साथ एकाकार हो जाती है ..विकास की क्रिया विपरीत ध्रुवों के घुलने-मिलने की सतत प्रगति है। फ़िक्ते ने ठीक कहा था स्थापना (thesis), ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
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• शिष्य है विसर्जन

ओशो

शिष्य है विसर्जन। शिष्य है समर्पण। शिष्य है आध्यात्मिक अर्थों में परम आत्मघात। अपने को पोंछ देना। एकदम से यह पोंछ देना संभव नहीं होता, नहीं तो व्यक्ति सीधा परमात्मा में विलीन हो जाए, सद्गुगुरु की बीच में सीढ़ी आवश्यक न हो। सद्गुगुरु की सीढ़ी आवश्यक होती है, ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
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• आमेज़न में कम होते जंगल

यहाँ के जंगलों की कटाई में भी तेज़ी आई है

ब्राज़ील से मिली उपग्रह की एक सूचना से पता चला है कि आमेज़न के जंगलों को तेज़ी से नष्ट किया जा रहा है. सूचना के अनुसार हाल के वर्षों में जंगलों के कटने की गति चालीस प्रतिशत बढ़ी है और यह पिछले दशक से ज्यादा तेज है   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: जल-जंगल-जमीन
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• प्रतीक्षा-गीत

अज्ञेय

हर किसी के भीतरएक गीत सोता हैजो इसी का प्रतीक्षमान होता हैकि कोई उसे छू कर जगा देजमी परतें पिघला देऔर एक धार बहा दे।पर ओ मेरे प्रतीक्षित मीतप्रतीक्षा स्वयं भी तो है एक गीतजिसे मैने बार बार जाग कर गाया हैजब-जब तुम ने मुझे जगाया है।उसी को तो आज भी गाता ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: साहित्य
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• क्यों कि तुम हो

अज्ञेय

मेघों को सहसा चिकनी अरुणाई छू जाती हैतारागण से एक शान्ति-सी छन-छन कर आती हैक्यों कि तुम हो।फुटकी सी लहरिल उड़ानशाश्वत के मूक गान की स्वर लिपि-सी संज्ञा के पट पर अँक जाती हैजुगनू की छोटी-सी द्युति में नये अर्थ कीअनपहचाने अभिप्राय सी किरण चमक जाती हैक्यों कि ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: साहित्य
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• सतपुड़ा के घने जंगल

भवानी प्रसाद मिश्र

सतपुड़ा के घने जंगल। नींद मे डूबे हुए से ऊँघते अनमने जंगल।झाड ऊँचे और नीचे,चुप खड़े हैं आँख मीचे,घास चुप है, कास चुप हैमूक शाल, पलाश चुप है।बन सके तो धँसो इनमें,धँस न पाती हवा जिनमें,सतपुड़ा के घने जंगलऊँघते अनमने जंगल। सड़े ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: जल-जंगल-जमीन
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• रियलिटी शो और मशहूर होने की ललक

सिर्फ नाच-गाकर ही नामचीन हो जाना चाहती है नई पीढ़ी

वर्तमान दौर इलेक्ट्रॉनिक मी़डिया का है......यह टीवी मीडिया लोगों का चेहरा बना और बिगाड़ रहा है.....लोग खुश हैं क्योंकि वे मशहूर हो रहे हैं......उन्हें लग रहा है कि दुनिया उन्हें देख रही है और खुशी और गम में उनका साथ दे रही है........इन बातों को भुनाने के ...   और पढ़ें...
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• यह चेतना

जे. कृष्णमूर्ति

मन हमेशा ताजा , युवा , अबोध ,ओजस्विता और उमंग से सरोबार हों ।इसके लिए काफ़ी चेतना की जरूरत होगी । तुम्हारे मन में क्या हो रहा है ,यह चेतना । इसी स्थिति में हम कुछ सीखते हैं ।मन में चल रहे भावों को सही और गलत के खाँचों में बाँटने की जरूरत नहीं , क्योंकि ऐसा ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
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• माँ

निदा फ़ाज़ली

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ , याद आता है चौका-बासन, चिमटा फुँकनी जैसी माँ । बाँस की खुर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे , आधी सोई आधी जागी थकी दुपहरी जैसी माँ । चिड़ियों के चहकार में गूँजे राधा-मोहन अली-अली , मुर्गे की आवाज़ से खुलती, घर की ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
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• शाहरुख खान बनाम भारतीय बच्चे और युवा

रुपया कमाना चाहते तो हैं लेकिन चंद प्रश्नों के उत्तर देकर...

दो-चार दिन पहले आप लोगों ने खबर पढ़ी होगी.....अब शाहरुख खान नया रियलिटी शो लेकर आ रहे हैं.....नाम है क्या आप पांचवी पास से तेज हैं......इसमें इनामी राशि होगी पांच करोड़ रुपए और सिद्धार्थ बसु फिर परदे के पीछे होंगे जो लोगों से पाँचवी कक्षा तक के प्रश्न ...   और पढ़ें...
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• डेली सोप्स और भारतीय महिलाएँ

एकता कपूर जैसे धारावाहिक निमार्ता देश को बर्बाद कर रहे हैं

कुछ दिन पहले अपने एक रिश्तेदार के घर जाना हुआ, दोपहर का समय था इसलिए घर की महिलाएँ टीवी के सामने जमी थीं......थोड़ी देर मैं भी बैठ लिया....चूंकी मैं दोपहर में अमूमन घर के बाहर रहता हूं इसलिए टीवी पर आने वाले भयावह धारावाहिकों (डेली सोप्स) से बचा रहता ...   और पढ़ें...
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• राजनीति तो करनी ही पड़ेगी यारों......

समर में कूदना समय की आवश्यकता जो है

कल बात राजनीति पर चल रही थी....लेकिन युवा बंधु वेलेंटाइन डे की तैयारियों में व्यस्त थे शायद इसलिए ज्यादा बात नहीं हो पाई.......लोग पढ़ भी नहीं पाए......लेकिन संदीप ने पढ़ा.....संदीप का कहना है कि हमारे पास तलवार नहीं है लेकिन हम कलम से ही सिर कलम ...   और पढ़ें...
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• राज ठाकरे की राजनीति और हम युवाओं का धर्म

राजनीति को सुधारने के लिए आखिर हम कब आगे आएँगे

राज ठाकरे पर काफी कुछ लिखा जा चुका.....बैबदुनिया के ब्लॉग्स पर भी और अन्य सब जगह भी.....सबने बेहतरीन लिखा....मैं भी पूर्व में राज ठाकरे को कोस चुका हूं........आज दिनभर यह सब पढ़कर ख्याल आया कि बाकी सब तो ठीक है लेकिन हम क्या कर रहे हैं इस देश की राजनीति ...   और पढ़ें...
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• स्वरोजगार की ओर जाना होगा हमें......

सिर्फ नौकरियां तरक्की की राह नहीं खोल सकतीं

अपनी बात शेखर पाठक की बात से शुरू करूंगा......आप पूछेंगे शेखर पाठक कौन...???? ....भई, पाठक साहब प्रसिद्ध समाजसेवी और घुमक्कड़ हैं, हिमालय के कई चक्कर लगा चुके हैं.....उत्तराखंड के विकास के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं और इसके लिए समय-समय पर कई जनआंदोलनों का ...   और पढ़ें...
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• शेयर बाजार, आईटी और बीपीओ का फुगावा

देर-सबेर तो इन्हें फूटना ही है, असली मेहनत तो शुरू ही नहीं हुई है

कुछ दिन पहले एक समूह में चर्चा चल रही थी....बात शेयर बाजार और आईटी-बीपीओ सेक्टर की हो रही थी.....इनकी ऊँचाइयों को देश की तरक्की बताया जा रहा था....एक बंदा दावा कर रहा था कि उसने अमेरिका की किसी इकॉनामिक मैग्जीन को पढ़ा है, उसमें लिखा था कि भारत का शेयर ...   और पढ़ें...
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• महर्षि महेश योगी और भारत का रुतबा

हमारे देश के सिर्फ कुछ ही लोगों ने दुनिया को हिलाया है

विश्व के १५० देशों में भारत और यहाँ की संस्कृति का रुतबा कायम करवाने वाले महर्षि महेश योगी बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। आप लोगों को गुरूवार के अखबारों में उनके बारे में बहुत कुछ पढ़ने को मिला होगा, लेकिन उससे पहले मैं भी आप लोगों से कुछ कहना चाहता हूं......   और पढ़ें...
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• अमिताभ के घर हमला.......और भारत में क्षेत्रीयवाद

हम भारतीय से ज्यादा क्षेत्र, प्रांत, जाति और भाषा के हैं

आप सबने पढ़ ही लिया होगा कि महानायक अमिताभ बच्चन के घर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। उन्होंने जुहू स्थित बच्चन के बंगले प्रतीक्षा पर कांच की बोतलें फोड़ीं और अमिताभ के लिए कुछ बुरा-भला कहकर चलते बने। वे लोग बाइक पर सवार होकर आए थे। प्रत्यक्षदर्शी कह रहे ...   और पढ़ें...
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