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अमिताभ के घर हमला.......और भारत में क्षेत्रीयवाद

हम भारतीय से ज्यादा क्षेत्र, प्रांत, जाति और भाषा के हैं

आप सबने पढ़ ही लिया होगा कि महानायक अमिताभ बच्चन के घर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। उन्होंने जुहू स्थित बच्चन के बंगले प्रतीक्षा पर कांच की बोतलें फोड़ीं और अमिताभ के लिए कुछ बुरा-भला कहकर चलते बने। वे लोग बाइक पर सवार होकर आए थे। प्रत्यक्षदर्शी कह रहे हैं कि वे लोग राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के थे। इस पार्टी के कार्यकर्ताओं और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच पहले भी झड़पें हो चुकी हैं और अब यह भयानक रूप ले चुकी हैं.... बात साफ है कि समाजवादी पार्टी और अमिताभ के बीच क्या रिश्ता है यह बताने की जरूरत नहीं है.....अमिताभ अपने संकट के समय से अमरसिंह और मुलायम सिंह के प्रति आभार जताते चले आ रहे हैं......सुब्रत राय सहारा के साथ उनका ग्रुप भी इसी के बाद बना......जया बच्चन भी समाजवादी पार्टी की कृपा से ही राज्यसभा सांसद और अन्य लाभ के पद प्राप्त करने में कामयाब रही हैं................. दूसरी बात महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश के लोगों के बीच है और यह झगड़ा भी राजनीतिज्ञों द्वारा बनाया गया ही है।

तो अब लड़ाई की मुख्य वजह बताता हूं......राज ठाकरे को शिव सेना को छोड़ने के बाद कोई प्रमुख मुद्दा मिल नहीं रहा.....लिहाजा उन्होंने बाल ठाकरे की तर्ज पर महाराष्ट्र जिंदाबाद का नारा ही उचित समझा और कुछ दिन पहले अमिताभ पर आरोप लगाए कि उन्होंने महाराष्ट्र के लिए कुछ खास नहीं किया जबकि वे महाराष्ट्र के बूते पर ही इतने बड़े बने हैं........राज ठाकरे का यह भी कहना है कि अमिताभ खा महाराष्ट्र की रहे हैं जबकि बजा उत्तरप्रदेश की रहे हैं.......यह बताने की जरूरत नहीं कि अमिताभ मूल रूप से उप्र के इलाहाबाद के हैं और राज ठाकरे को पता है कि उनपर हमला करके वे आसानी से लाइमलाइट में आ सकते हैं जिसके लिए वे काफी समय से प्रयासरत हैं।

अगली बात शुरू करने से पहले राज ठाकरे को सोच प्रदान करने वाली शिव सेना की कुछ बातें बताना चाहूंगा........लगभग दो दशकों से भाजपा के साथ मिलबैठकर राजनीति करने वाली शिवसेना ने राष्ट्रपति चुनावों में अपने पुराने साथी भैंरोसिंह शेखावत को सिर्फ इसलिए धता बता दी क्योंकि वे राजस्थान के राजपूत हैं....जबकि प्रतिभा पाटील को सिर्फ इसलिए समर्थन दिया क्योंकि वे महाराष्ट्र की हैं और मराठी हैं जबकि श्रीमती पाटील शिवसेना की धुर विरोधी कांग्रेस की प्रत्याशी थीं......वाह क्या सोच है हिंदूवादी शिवसेना की......कुल मिलाकर इसे दोगला व्यवहार ही कहा जाएगा जो भाषा और क्षेत्र के पीछे देश को नहीं देखे खैर,.......इससे पहले भी शिवसेना आपाणा मानुष और आमची मुंबई वाली नारे देकर हमारी संस्कृति में जहर घोल चुकी है........वह यह भी कह चुकी है कि मुंबई में उप्र और बिहार के लोगों ने बहुत बर्बादी फैला रखी है और अब मुंबई में आने वाले लोगों पर नजर रखनी होगी.......हद हो गई क्षेत्रीयता की......

तो दोस्तों अब मुख्य बात.......कि हम सबकुछ हैं लेकिन भारतीय अब भी नहीं हैं........और हमारे हिन्दू धर्म की तो बात ही छोड़ दो.......इस कदर खाईयां पैदा हो गई हैं कि नीचे झांकते भी नहीं बनता..........कुछ उदाहरण देना चाहूंगा...........

हमारे देश में लोगों ने अब जाति के हिसाब से महापुरुषों को भी बाँट लिया है...........अगर भीमराव अंबेडकर की बात होगी तो कोई दलित ही करता मिलेगा............अगर अमर शहीद क्रांतिकारियों की बात सिंधी समाज कर रहा होगा तो वह हेमू कालानी होगा.....अगर कोई ब्राह्मण करता मिलेगा तो चन्द्रशेखर आजाद हो सकते हैं..........फिर भगतसिंह तो सिख थे ही....... इसी प्रकार महात्मा गाँधी की बात सिर्फ कांग्रेसी या गाँधीवादी ही करते हैं, भाजपा कभी करती दिखाई नहीं देती जबकि उन्हें राष्ट्रपिता का दर्जा दिया गया है और दुनिया उनको मान रही है..............जातिवाद और क्षेत्रीय समीकरण इतने ज्यादा हैं कि चुनावों में तो इस आधार पर टिकट मिलता ही है अब भारतीय क्रिकेट टीम भी इससे बची नहीं है.........सौरव गांगुली या द्रविड़ बाहर होंगे तो कोलकाता या कर्नाटक के किसी खिलाड़ी को ही उनके स्थान पर टीम में लिया जाएगा.....ताकि समीकरण बना रहे........

समीकरणों ने क्या किया है यह आपको देश की विधानसभाओं और संसद कों देखकर पता चल जाता है.......इन समीकरणों की बदौलत जो लोग हमारी विधायिका में पहुँचे हैं वे किस प्रकार के हैं यह बात समीकरणों की असलियत बता देती है......इन समीकरणों ने इतनी बुरी गत कर दी है कि राजस्थान में हुआ गुर्जर आंदोलन एक चेतावनी के तौर पर आया है और अगर अभी भी हम नहीं समझे तो यह आग देश भर में लगेगी और इससे क्या होगा इसका सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

लोगों के दिमाग की बातें करें तो मुलायम सिंह यादव उप्र के मुख्यमंत्री बने.......उन्होंने सोचा कि संसार भर के यादवों का वे अकेले ही उद्धार कर देंगे.....तो साहब उन्होंने २०,००० लोग पुलिस में भर्ती कर लिए....सबके सब यादव......और अब बेचारी मायावती उन सब लोगों को वापस बाहर करने में मेहनत कर रही हैं........यानी एक गड्ढा खोद रहा है तो दूसरा भर रहा है और पूरा समय इसी में जाया हो रहा है........देश को कोई नहीं देख रहा बस धर्म, भाषा, जाति, क्षेत्र और इन्हीं से जुड़े समीकरणों को हल करने में ही हमारे देश के लोग और राजनीतिज्ञ जिंदगी की सारी मेहनत किए दे रहे हैं........

हमारे देश के १०० करोड़ लोगों का श्रम और दिमाग सिर्फ अपने देश और यहां की सभ्यता के लिए सोचे तो क्या नहीं हो सकता.......... लेकिन यह जब भी होगा स्वप्रेरित होगा क्योंकि विश्व की १७ प्रतिशत आबादी को किसी डंडे से नहीं हांका जा सकता.......ना ही उनसे जबरदस्ती की जा सकती है........तो अब यह हमारे ऊपर है कि हम छोटी सोच से आगे बढ़कर बड़ी सोच तक कैसे पहुँचते हैं.......या फिर अपने प्रदेश की बात छोड़कर कैसे देश की बात करते हैं.........कैसे अपनी सभ्यता की बात करते हैं.........आशा है इन बातों से दोस्त सहमत होंगे......

आपका ही सचिन........।

प्रतिक्रियाएँ

Re: अमिताभ के घर हमला.......और भारत में क्षेत्रीयवाद
सही बात है बंधु, कुछ लोगो का जीवन ही जहर घोलने पर चलता है, यह और कुछ नही नव नाजीवाद का ही एक स्वरुप है जिसमें लोगो की धार्मिक, क्षेत्रीय या सामाजिक भावना को भडका यह लोग खुद को स्थापित करने मे लगें है, वैसे भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारो (रहने और कार्य करने की स्वतंत्रता) के हनन के आरोप मे राज ठाकरे को राजद्रोही घोषित कर दंडित किया जाना चाहिए|
Re: अमिताभ के घर हमला.......और भारत में क्षेत्रीयवाद
सचिन भाई , मै आप से बात करना चाहता हूँ....हॉ सके तो अपना नबंर दे......
Re: अमिताभ के घर हमला.......और भारत में क्षेत्रीयवाद
राज ठाकरे, जो लोगो को छेत्रवाद, भाषावाद की लडाई मे उलझा कर सिर्फ और सिर्फ अपाना फयादा देख रहे है. फुट डालो 'राज्' करो की राजनीति कारने वाले येसे नेता ना देश का ना ही अपनी समाज का भला कर पाते है. आप सोचीये जो व्यक्ति अपने परिवार का ना हुआ वो मराठीयों का कैसे हो सकता है? जीसने(चाचा) उन्हें राजनीति का, क ख ग सीखाया आज वो अपने नीजी फायदे के लिये उनके खिलाफ ख़डे हो गये. कीसी ने सच कहा है ये नेता हमारे देश के लिये कैन्सर है यदि भविष्य मे कैन्सर का इलाज खोज लीया गाया तो हमे राज ठाकरे जैसे नेताओ के लिये नया नाम खोजना पडेगा.
Re: अमिताभ के घर हमला.......और भारत में क्षेत्रीयवाद Re: Amitabh Bachchans house attacked in India and regionalism .......
hi
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