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महर्षि महेश योगी और भारत का रुतबा

हमारे देश के सिर्फ कुछ ही लोगों ने दुनिया को हिलाया है

विश्व के १५० देशों में भारत और यहाँ की संस्कृति का रुतबा कायम करवाने वाले महर्षि महेश योगी बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। आप लोगों को गुरूवार के अखबारों में उनके बारे में बहुत कुछ पढ़ने को मिला होगा, लेकिन उससे पहले मैं भी आप लोगों से कुछ कहना चाहता हूं.......कि इन कुछ ही लोगों ने विश्व में भारत का मस्तक इतना ऊँचा कर दिया कि लोग देखते हैं तो उनकी टोपी गिर जाती है.......ये लोग विलक्षण थे.....अच्छे-अच्छों को हिलाने की ताकत थी इनमें......इन्होंने इतने लोगों को अपना बनाया कि विश्व के कई धर्मों के अनुयायी भी उतने नहीं हैं........तो गिनाने शुरू करता हूं, सिर्फ चार लोगों की बात करूंगा.......कुछ उदाहरण भी दूंगा, आप लोगों से सहयोग अपेक्षित है....


तो महर्षि महेश योगी जी के बारे में कुछ बातें बताना चाहूंगा, योगी जी फिलहाल डच शहर वालड्राप में अपना मुख्यालय बनाए हुए थे। डच यानी नीदरलैंड में उनके अनुयायीयों की बातें करने से पूर्व उनको दुनिया के नक्शे पर रखना चाहूंगा....उनका काम संसार के १५० देशों में था.....कई गोरों को उन्होंने अपने आगे नतमस्तक करवाया.... योगी जी के नाम एक अनोखा रिकार्ड भी है.....दुनिया की कुछ सबसे बड़ी इमारतें बनवाने काम भी उन्होंने किया......उन्होंने ब्राजील के शहर रीयो डि जेनेरियो में ८५ मंजिल की इमारत में अपना आश्रम शुरू किया था..... वहीं वे एक ११६ मंजिल की इमारत भी बनवाने वाले थे.....जबलपुर में तो १२४ मंजिल की एक इमारत बनवाने का काम तो उन्होंने शुरू भी कर दिया था..यह विश्व की सबसे ऊंची इमारत भी होती....लेकिन मीटिरोलॉजिकल सोसायटी ने उस इलाके को भूकंप प्रभावी इलाका घोषित कर दिया जिसके बाद उस इमारत का काम रोक दिया गया.......योगी जी के पास कुल ४ अरब डॉलर यानी १७० अरब रुपए की संपत्ति थी और वे विश्व के कुछ सबसे धनी व्यक्तियों में से एक थे........उन्होंने ६०-७० के दशक में एेसे लोगों को अपना दीवाना बनाया जिनकी दुनिया दीवानी थी, उन्होंने भावातीत योग से दुनिया को रूबरू करवाया......प्रसिद्ध रॉक बैंड बीटल्स भी उनमें से एक था........नीदरलैंड में रहते हुए उन्होंने राम नाम की करेंसी भी चलाई....इसके एक, दो, पाँच और दस के नोट थे......इन्हें बाकायदा नीदरलैंड सरकार ने मान्यता भी दी थी.....बताइए....हमारे देश में राम नाम पर सिर्फ राजनीति ही होती है जबकि डच सरकार से यह काम करवा कर योगी जी ने बाकायदा मिसाल पेश की थी......इस करेंसी पर भगवान श्री राम का बाकायदा चित्र भी बना हुआ था.....मेरे पास इस करेंसी का फोटो है लेकिन मैं उसे यहाँ डाउनलोड करना नहीं जानता.....उसे फिर कभी आप लोगों को दिखाउंगा......योगी जी ने दुनिया में भारत और हमारे धर्म का जमकर प्रचार किया। संसार भर में उनके अनुयायियों की संख्या लगभग ६० लाख है...ठीक उतनी ही इसराइल की कुल जनसंख्या है....... और पिछले साल सेवानिवृत्ति लेने से पहले उन्होंने कहा कि अपने गुरू द्वारा दिया गया काफी सारा काम उन्होंने पूरा कर लिया है अतः अब वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं.........भई कमाल के थे योगी जी.....

इस कड़ी मे मैं दूसरा नाम भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद का लेना चाहूंगा.....ये इस्कान के संस्थापक थे....वही इस्कान जिसने दुनिया भर के गोरों से हरे राम...हरे कृष्ण गवा लिया और विश्व में इस्कान के जितने भी मंदिर हैं उनमें से २५ करोड़ से कम का कोई नहीं है........उन्होंने संसार के कई दिग्गजों से रईसों से कहलवा लिया कि भगवान श्रीकृष्ण ही असली परमात्मा हैं........ मैंने भारत के कई शहरों में इस्कान के मंदिर देखें हैं.......आप लोगों ने भी देखे होंगे लेकिन कृष्ण जन्मभूमि मथुरा का इस्कान मंदिर देखिए......जब मैं वहां गया तो भगवत गीता और श्रीकृष्ण कथा कई विदेशी मुझे बेचने के लिए आगे आए......और जब मैंने उनसे वो किताबें खरीद लीं तो उनके चेहते पर एक अपार संतोष दिखा और भाव एेसे जैसे हमने उनपर कोई एहसान कर दिया हो......कुल मिलाकर स्वामी प्रभुपाद ने दुनिया में हमारी संस्कृति का घंटा बहुत जोर से बजाया था.........

तीसरे हैं स्वामी नारायण संप्रदाय के भगवान स्वामी नारायण.....उन्होंने १८वीं शताब्दी में इस पंथ की स्थापना की और आज विश्व के कुछ सबसे भव्य हिन्दू मंदिरों के साथ ही दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर, दिल्ली में बनवाने का नाम भी इस पंथ के साथ जुड़ा है......आपने कुछ दिन पहले लंदन में भी इनके द्वारा अरबों रुपए का एक मंदिर बनवाने का सुना होगा......आखिर हो भी क्यों नहीं इस पंथ ने विश्व के सबसे बड़े और सबसे भव्य मंदिरों का निर्माण कराया और हमारी संस्कृति का डंका पूरे विश्व में बजाया.....दिल्ली वाले मंदिर का नाम गिनीज बुक में भी दर्ज है.........इस संप्रदाय के अनुयायी संसार भर में लाखों की संख्या में मौजूद हैं।

चौथे हैं अमेरिका की नाक के नीचे से कई बाल तोड़ने वाले ओशो.......भले ही ओशो का नाम कई विवादों में रहा.....उनपर खुलेआम सेक्स के पक्ष में बोलने और बौद्धिक रूप से जे.कृष्णमूर्ति की बातें चुराने के आरोप लगे हों लेकिन मैं फिर भी एक मामले में उनका पक्ष लेना चाहूंगा....... ओशो लॉजिस्टिक्स और फिलासफी के प्रोफेसर रहे......तर्कशास्त्र के इतने बड़े ज्ञाता कि जो उन्हें सुनता.....बस उनका ही हो जाता.....कॉलेज के छात्र और युवा आज भी ओशो और स्वेट मार्डन को पढ़ने के बाद ही पास-आउट होते हैं.....ओशो क्रांतिकारी थे और युवाओं को उनकी बातें हमेशा पसंद आती हैं......ओशो ने राल्स रॉयस कार के देश में यही कार सबसे ज्यादा रखकर दिखाई और एेसी हलचल मचाई कि अमेरिका को उन्हें स्लो पायजन (धीमा जहर) देना पड़ा......जीवन के बाद के वर्षों में ओशो मौनव्रत धारण किए रहे......लेकिन मैं इतना जानता हूं कि जब मैं पूना में ओशो कम्यून गया था तो मैंने तो वहां ढेरों विदेशियों को लाल वस्त्र पहने सेवा कार्यों में जुटा देखा.....ओशो ने संसार भर में नाम कमाया और भारत का डंका बजाया......


तो भाइयों लिस्ट बहुत लंबी है..........कई हैं जिन्होंने दुनिया को झुकाया........ललितपुर के पास अपनी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध चंदेरी है...वहां आनंदपुर ट्रस्ट, पंथ का साम्राज्य है....१८ हजार एकड़ में फैला हुआ....लोग कहते हैं कि वहां नमक को छोड़कर सबकुछ बना लिया जाता है......उनके अनुयायी भी विश्वभर में बिखरे हुए हैं........माउंट आबू मुख्यालय वाला ब्रह्माकुमारीज भी विश्व के लगभग १०० देशों में है.........कुल मिलाकर हमारे विराट धर्म, जिसे मैं यहां सनातन धर्म ही कहना उचित समझूंगा......कि कुछ शाखाएं ही संसार भर को ज्ञान दे रही हैं.......विराट वट वृक्ष जितना पुराना होता है उसकी उतनी ही शाखाएं और प्रशाखाएं होती हैं......उसी प्रकार हमारे धर्म और संस्कृति की विराटता भी इसी से परिलक्षित होती है........आशा है आप लोग भी मेरी तरह इन बातों से संतोष और गर्व की अनुभूति करेंगे........


आपका ही सचिन......।

प्रतिक्रियाएँ

Re: महर्षि महेश योगी और भारत का रुतबा
आपका लेख अच्छा लगा। मैं अक्सर पढ़ता रहता हूँ। महर्षि महेश योगी ने भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार और खासकर योग के प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका योगदान भूला नहीं जा सकता।
Re: महर्षि महेश योगी और भारत का रुतबा
भाई वाह, आपका आलेख बहुत बढिया लगा ! ये जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि योगी जी ने बाकायदा राम मुद्रा चलायी. जब और ढूंढा तो पता चला कि अभी भी यह नीदरलेंड के कुछ भागो मे स्वीकार की जाती है और 1 राम की कीमत 10 यूरो यानी लगभग 560 रु है ! - सत्यदेव शर्मा ( www.satyadev.net ) Email : satyadev@satyadev.net
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