कुछ दिन पहले एक समूह में चर्चा चल रही थी....बात शेयर बाजार और आईटी-बीपीओ सेक्टर की हो रही थी.....इनकी ऊँचाइयों को देश की तरक्की बताया जा रहा था....एक बंदा दावा कर रहा था कि उसने अमेरिका की किसी इकॉनामिक मैग्जीन को पढ़ा है, उसमें लिखा था कि भारत का शेयर बाजार ४५००० के अंक को भी एक दिन छुएगा....वह खुश हो रहा था कि भारत तरक्की कर रहा है.....मैं भी वहाँ उपस्थित था....मैंने उससे पूछा कि क्या वाकई ये तीन सेक्टर मिलकर हमारे देश को चमन कर रहे हैं????........और यह भी पूछा कि क्या गारंटी है कि शेयर बाजार के फूलते इस फुग्गे में किसी दिन कोई पिन नहीं पड़ेगी......बात चर्चा तक सीमित थी लेकिन अगले ही दिन शेयर बाजार १५०० अंक नीचे गिरा.....छोटे निवेशकों का दिवालिया निकल गया.....और अगले कुछ दिनों में जिन छोटे निवेशकों ने फिशिंग करनी चाही उन्हें हाथ ही नहीं डालने दिया गया....शेयर बाजार भी जानता है कि उसे किसे फायदा देना है........और हां, तब से शेयर बाजार लगातार नीचे गिर रहा है....उस दिन शेयर बाजार २१००० अंक पर था और अब १७ हजार के आस-पास चल रहा है.....बाकि शेयर बाजार के ऊपर मैं अपने ब्लॉग में पहले एक बार लिख चुका हूं इसलिए दोहराव से बच रहा हूं.....
तो अब उन कुछ बातों को मैं आपके सामने भी रख रहा हूं जिनपर मुद्दा गरम था......कि क्या वाकई ये तीन सेक्टर देश पर हावी हो रहे हैं.....एक दिन एमबीए की क्लास में बिजनिस एनवायरमेंट के लेक्चर में लेक्चरर ने फिर वही बात दुहरा दी.....कि भारत की इंडस्ट्रीज ग्लोबल हो रही हैं....मैंने पूछा उनसे....कौन सी इंडस्ट्रीज ग्लोबल हो गई भारत की.....तो वो बोले साहब आईटी और बीपीओ.....सही बताऊँ...मैं तो पक चुका हूं इनका नाम सुनते-सुनते.......बीपीओ का कैसा काम है मैं बताना नहीं चाहता......आप लोग जानते हैं.......इस इंडस्ट्री के सफरर्स को भी जानते होंगे......और आईटी ने हमारे देश में क्या किया है बताने की जरूरत नहीं.....उदाहरण देना चाहूंगा.....एक दिन मुझे एक सज्जन मिले.....अच्छे रुतबे वाले पद पर हैं.....काफी ज्ञानवान भी.....उम्र ५० के आस-पास.....उनका इकलौता लड़का है......पिछले आठ साल से अमेरिका में है.....इस दौरान सिर्फ दो बार भारत आया.....ये लोग जा नहीं पाए.....पति-पत्नी अकेले रहते हैं.....कारण आप समझ ही गए होंगे....वही आईटी का चक्कर.......हालांकि वे सज्जन गर्व से फूले नहीं समा रहे थे....लेकिन एेसे इतने लोगों से मिल चुका हूं कि लिखने बैठूं तो कॉपियां भर जाएं......आईटी ने परिवार उजाड़ दिए.....उस अमेरिकी चमक और रुपए-पैसे ने संपन्न घरों के लड़कों को भी सात समंदर पार पहुँचा दिया......अब तो फैशन सा बन गया है यह कहने का हमारा बेटा...अमेरिका में है और आईटी सेक्टर में है....... कहने का.......
आईटी का रुतबा या हौवा एेसे ही नहीं बना.......२५ साल के लड़कों को ५० हजार से १ लाख रुपए वेतन मिल रहा है.....यहीं भारत में....विदेशों में डॉलर में कमा रहे हैं......तो बस सब अपना कैरियर इसी कंप्यूटर की १७ इंच की स्क्रीन पर खोज रहे हैं.....ह्यूमेनिटिज खत्म, भाषाएं खत्म, आधारभूत विज्ञान खत्म....... समाज शास्त्र और राजनीति विज्ञान बोगस विषय बन गए हैं.....बीए, बीकॉम सिर्फ ग्रेजुएट कहलाने के लिए किए जाने लगे हैं...... सारी फैकल्टीज मर गई हैं.......बच्चा या ता डॉक्टर बनेगा......या आईआईटी में जाएगा.....नहीं तो कैट ब्रेक करेगा और आईआईएम जाएगा..... देश जाए भाड़ में....सिर्फ विदेश में तरक्की करेगा और यहां उसके परिजन उसकी सफलता के किस्से सुनाएँगे....हम जैसे लोगों को.....और गौरांवित होंगे...... अच्छी अंग्रेजी जानने वालों के लिए बीपीओ सेक्टर है........बस वहां एक ही दिक्कत है.....रुपए के अलावा आप कुछ नहीं कमा सकते.....हां तरल लहजे में सर-सर की रट और डांट पड़े तो भी मुस्कुराना भर तो करना ही पड़ता है......
तो आईटी सेक्टर शानदार चल रहा था....कि अचानक अमेरिकी बाजार की मंदी यहां भी हावी होती दिखी (शेयर बाजार भी इसी के चलते गिरा था).... तो टीसीएस ने अपने ५०० कर्मचारियों को निकाल दिया.....वेतन तो पहले ही काट चुका था....विप्रो ने भी अभी इसी तरह का कदम उठाया था.....बस फिर क्या था......अब बहस चल रही है कि आईटी के फुगावे की भी हवा निकल रही है क्या......कहने की जरूरत नहीं है......समीक्षाएँ खुद ही बता रही हैं......लेकिन इस विषय पर अभी बहुत कुछ लिखना बाकी रह गया है.......तो बाकी अगले पृष्ठ में........आशा करता हूं कि दोस्त इसे पढ़ेंगे.....
आपका ही सचिन.........।
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