हर किसी के भीतरएक गीत सोता हैजो इसी का प्रतीक्षमान होता हैकि कोई उसे छू कर जगा देजमी परतें पिघला देऔर एक धार बहा दे।पर ओ मेरे प्रतीक्षित मीतप्रतीक्षा स्वयं भी तो है एक गीतजिसे मैने बार बार जाग कर गाया हैजब-जब तुम ने मुझे जगाया है।उसी को तो आज भी गाता ...
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