Web Webdunia.com सचिन की दुनिया
Webdunia Portal |  Greetings |  Classifieds |  E-mail |  Take A Tour |  Font Download |  Feedback
X
Welcome, Guest  [ Portal's List |  Create Portal |  Sign In ]

मार्च 2008

 

• How is the mind to be made new, fresh, innocent?

Think on These Things, by J.Krishnamurti

one to one with J.KrishnamurtiIs it possible for the mind not to deteriorate?The mind is old when it is not fresh, when it is always thinking in terms of the past and using the present as a passage to the future. It is such a mind that is not young. And ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
119 views. 3.67 rating from 3 votes.

• Truth is a Pathless Land

by J. Krishnamurti

Krishnamurtis during his speech dissolving the Order of the StarWhat follows is the speech made by Jiddu Krishnamurti in 1929 when he dissolved the Order of the Star. The Order of the Star was the organisation built around Krishnamurti by Theosophists who ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
101 views. 3.67 rating from 3 votes.

• शून्य के लिए ही मेरा आमंत्रण

ओशो

एक साधु ने अपने आश्रम के अंत:वासियों को जगत के विराट विद्यालय में अध्ययन के लिए यात्रा को भेजा था। समय पूरा होने पर वे सब, केवल एक को छोड़कर, वापस लौट आये थे। उनके ज्ञानार्जन और उपलब्धियों को देखकर गुरु बहुत प्रसन्न हुआ था। वे बहुत कुछ सीख कर वापस लौटे ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
138 views. 3.67 rating from 3 votes.

• यहाँ थी वह नदी

मंगलेश डबराल

कहा जाता है, जहाँ ना पहुँचे रवि...वहाँ पहुँचे कवि.....कवियों ने हमेशा देश-समाज और प्रकृति की ओर हमारा ध्यान दिलाया है और उन सबका ध्यान रखा है.......मंगेश डबराल साहब ने भी हमेशा पहाड़ और नदियों की बातें की हैं......हमें उन सबके नजदीक ले जाकर छोड़ा है.......पेश है नदी के ऊपर उनकी एक मार्मिक कविता.......सचिन   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: साहित्य
102 views. 1.0 rating from 1 votes.

• शक्ति और क्षमा

रामधारी सिंह "दिनकर"

दुनिया शक्ति का ही सम्मान करती है......यह बात सबको पता है.....संसार में इसी की माँग है.....उगते सूर्य को ही सब प्रणाम करते हैं......बचपन से ही आदरणीय दिनकर साहब की यह कविता मेरी पसंदीदा है......मैं चाहता हूँ कि हर भारतवासी इसे पढ़े और अपने जीवन में अपनाए.....सचिन   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: साहित्य
102 views. 3.0 rating from 2 votes.

• रचनात्मकता नाम की कोई चीज़ नही है

क्रांतिकारी विचारधारा के यूजी कृष्णमूर्ति से एक प्रश्न

एक आदमी , जिसने पहली बार ज्ञान और बोध को अस्तित्व की न्यूरो बायोलोजिकल अवस्था के रुप मे देखा। जिसने कहा कि इसका धार्मिक , मनोवैज्ञानिक या रहस्यवादी आशयों से कोई संबंध नही है। यह एक बिकुल नयी अवधारणा है , "प्रबुध्धता" जैसी चीज़ के प्रति वास्तव मे एक ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
76 views. 3.34 rating from 3 votes.

• पिता

निदा फाजली

माँ की महिमा अपरंपार होती है। माँ की ममता के बारे में हम सब जानते है...सुनते हैं.....समझते हैं लेकिन हमने पिता के बारे में काफी कम बातें की हैं....वो पिता जिसके बगैर परिवार एक दिन भी नहीं चल सकता......वो पिता जो अपने कंधों पर पूरे परिवार का बोझ लेकर चलता है....मरते दम तक.......और वो पिता जो जब तक बना रहता है पूरे परिवार को अपने सिर पर एक साया.....एक छत्रछाया सी महसूस होती रहती है......पिता का होना ही अपने आप में महत्वपूर्ण हैं....हम सब बच्चे कहीं ना कहीं अपने पिता को ही परिलक्षित करते हैं.......उन्हें अपने अंदर जीते हैं........पेश है पिता के ऊपर निजा फाजली की दिल को छू लेने वाली कविता........सचिन   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
127 views. 4.18 rating from 6 votes.

• दुनिया भर के जंगलों पर मंडरा रहा है खतरा

तेज़ गति से जंगलों को काटा जा रहा है

जंगलों के मामले में अपने देश के साथ ही पूरे विश्व की हालत भी लगभग खस्ता है......जहाँ विकसित देश अपनी जिम्मेदारी को थोड़ा-बहुत समझ रहे हैं वहीं विकासशील और अविकसित देश विकास के नाम पर अभी भी अपने यहाँ के जंगलों को हलाल किए जा रहे हैं........मैं समय-समय पर विश्व और भारत में जंगलों के हो रहे विनाश पर खबरें देता रहूँगा.....इनका न्यूज सोर्स फिर भले ही कोई सा भी हो.......वो भी यहाँ उल्लेखित रहेगा.........सचिन   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: जल-जंगल-जमीन
118 views. 3.67 rating from 3 votes.

• संवेदनशून्य होता हमारा समाज

अनुपम मिश्र

जब दिल्ली रहा करता था तो श्री अनुपम मिश्र से मेरी भेंट होती रहती थी.........मैंने उनसे कई बातों के साथ विनम्रता का पाठ भी सीखने की कोशिश थी.....शायद थोड़ा कामयाब हुआ होऊंगा.......उनकी दी हुई किताबें आज भी खरे हैं तालाब और राजस्थान की रजत बूंदे मेरे लिए आज भी धरोहर समान हैं.......मैं उनका यह लेख प्रकाशित कर प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ.......आगे भी उनके लेख लेता रहूँगा........यह लेख वैबदुनिया पहले ही प्रकाशित कर चुका है........सचिन   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: जल-जंगल-जमीन
132 views. 4.01 rating from 4 votes.

• हिंदी मीडिया का नया आयाम लेकिन व्यवसायिकता की कमी - भाग दो

न्यूजपेपर इंडस्ट्री को इंडस्ट्री बनने में अभी भी समय है

तो दोस्त लोगों बात हो रही थी मीडिया की.......खासकर हिन्दी मीडिया की......तो देश में बड़े हिन्दी अखबार के ग्रुप लगभग दस हैं.....तो मतलब हमारे पास आप्शन भी इतने ही हुए.....वहीं दूसरे सेक्टर्स में कंपनियों की संख्या कई हजारों में है और वह भी बड़े साइज की ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: विचार पृष्ठ
687 views. 4.21 rating from 5 votes.

• हिंदी मीडिया का नया आयाम लेकिन व्यवसायिकता की कमी - भाग एक

बड़ी घोषणाओं के बाद भी काफी अखबार टांय-टांय फिस्स बोल जाते हैं

कल देश के कुछ बड़े हिन्दी अखबारों में से एक दैनिक भास्कर के डॉयरेक्टर (मार्केटिंग) गिरीश अग्रवाल की कही बात पढ़ रहा था.....कि देश में आने वाले समय में बहुत से पत्र-पत्रिकाएँ आ रहे हैं इसका मीडिया जगत को जबरदस्त फायदा मिलेगा........फिर कुछ दिन पहले (एक माह ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: विचार पृष्ठ
118 views. 4.21 rating from 5 votes.

• अब पानी गुलाम बनाने का जरिया बन रहा है

मॊड बार्लो और टोनी क्लार्क

स्कूल में हमें पढाया जाता है कि पृथ्वी का जल-चक्र एक बन्द प्रणाली है . अर्थात वर्षा और वाष्पीकरण द्वारा सतत रूप बदलता पानी पृथ्वी के वातावरण में जस का तस बना हुआ है. न सिर्फ़ पृथ्वी के निर्माण के समय हमारे ग्रह पर जितना पानी था वह बरकरार है अपितु यह यह ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: जल-जंगल-जमीन
154 views. 2.34 rating from 3 votes.

• इंदौर में दम तोड़ते तालाब

हम नहीं संभाल पा रहे रजत बूंदों को, ध्वस्त होती तालाबों की चैनल व्यवस्था

सचिन शर्माइंदौर। पानी की मनुष्य के जीवन में क्या महत्ता है इसे बताने की शायद किसी को जरूरत नहीं है। यह सभी जानते हैं कि पुराने समाज में पानी को रजत बूंदों के माफिक संभालकर रखा जाता था। इंदौर भी इस मामले में अपवाद नहीं था और होल्कर स्टेट में इसके लिए काफी ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरे आलेख
138 views. 3.67 rating from 3 votes.

• क्या संसार का समाज वहशी होता जा रहा है?

छोटी-छोटी बच्चियों को भी यौन प्रताड़ना देने से बाज नहीं आ रहे लोग..

आज दो खबरें पढ़ीं.....पढ़कर मन खट्टा हो गया.......पहली थी कि दुनिया भर में गुरू यानी किसी स्कूल या कॉलेजों में पढ़ाने वाले अध्यापक गुरू दक्षिणा के रूप में अपनी छात्राओं से किसी ना किसी प्रकार यौन सुख की अपेक्षा रखते हैं.......कई मामलों में ये सफल भी हो ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: विचार पृष्ठ
141 views. 4.6 rating from 18 votes.

• क्रिकेट बिकता है लेकिन हॉकी नहीं...

भारतीय हॉकी की यह दुर्दशा तो होनी ही थी....

आप लोगों को कल यानी मंगलवार के अखबारों की हैडलाइन अभी से बताना चाहूंगा.....कि भारतीय हॉकी टीम पिछले ८० वर्षों में पहली बार ओलंपिक में नहीं जा पा रही है...और...कि यह देश आठ बार का ओलंपिक हॉकी गोल्ड मेडल विजेता है और एक बार का विश्व-चैंपियन भी है और अब इसकी ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: Blog
148 views. 4.3 rating from 7 votes.

• मैं महिला दिवस का विरोधी हूँ

क्या जरूरत है उसका दिवस मनाने की जो दुनिया को जन्म देती है..??

मैं महिला दिवस मनाए जाने का घोर विरोधी हूँ......इसलिए नहीं कि मैं महिलाओं का विरोधी हूँ.....बल्कि इसलिए क्योंकि यह दिवस बताता है कि महिलाएँ समाज में आज भी कमजोर हैं......यह दिवस मुझे हिन्दी दिवस की याद दिलाता है.....जिस प्रकार हिन्दी दिवस और हिन्दी ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: विचार पृष्ठ
347 views. 4.57 rating from 33 votes.

• नर्मदा-ताप्ती को प्रदूषण से खतरा

औद्योगिक पट्टी कर रही है पुण्यनीरा नदियों का सत्यानाश

सचिन शर्मामध्यप्रदेश की औद्योगिक पट्टी इंदौर क्षेत्र में बहने वाली नर्मदा और ताप्ती नदियों को औद्योगिक प्रदूषण से बेहद खतरा है। यह खतरा मुख्यतः क्षेत्र के पाँच जिलों इंदौर, खण्डवा, खरगौन, बुरहानपुर और बड़वानी में स्थित लगभग १२०० छोटी औद्योगिक इकाइयों से ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: जल-जंगल-जमीन
78 views. 4.35 rating from 6 votes.

• मिट्टी में मिलता आजतक चैनल

अब इसके पास क्रिकेट, सिनेमा और अपराध के अलावा और कुछ नहीं बचा

नवीन पीढ़ी के भारत के धुँआधार पत्रकार श्री सुरेन्द्र प्रताप सिंह (एसपी) के सपने को मैं आजकल मिट्टी में मिलता हुआ देख रहा हूं.......नवभारत टाइम्स में एक सफल और जानदार पारी खेलने के बाद एसपी ने जिस तेज और तीव्रता के साथ आजतक नाम की इलेक्ट्रानिक मीडिया में ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: Blog
325 views. 4.67 rating from 37 votes.

• स्वास्थ्य पर भारी नौकरियाँ

रोजी-रोटी तोड़ रही है आम आदमी के शरीर को, काम धंधों से जुड़ी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं लोग

सचिन शर्मारोजी-रोटी की जरूरत ने देश के महानगरों के बाशिंदों को इस कदर मजबूर कर दिया है कि अब नौकरियाँ स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी हैं। काम के बोझ के तले पहले से ही आधे झुक चुके लोग अब अपने काम-धंधों के चलते विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। हालात ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: मेरे आलेख
239 views. 3.67 rating from 3 votes.

• पेरिस हिल्टन.......और मीडिया का मायाजाल

सेलीब्रिटी के बारे में दिखाना आजकल मीडिया का पहला धर्म है

अभी एक खबर पढ़ी....कि पेरिस हिल्टन अपनी पार्टी गर्ल वाली इमेज बदलना चाहती हैं.......वे लॉस एंजेलिस के किसी स्टोर में बुद्ध धर्म की किताबें खरीदती हुई दिखीं थीं....इसके बाद उन्होंने बुद्ध धर्म के ऊपर अपने कुछ दोस्तों से चर्चा भी की........भई वाह....क्या ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: विचार पृष्ठ
129 views. 4.02 rating from 9 votes.

• अंग्रेजी...गोरी चमड़ी....से खौफ या प्रेम

क्रिकेट और फिल्म इंडस्ट्री का वन टू वन

आज दो-तीन बातें जोड़कर लिखूंगा...समझिएगा......   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: विचार पृष्ठ
182 views. 4.16 rating from 7 votes.

• डॉग पार्लर और अर्थ की असमानता

जिनके पास रुपया है उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि खर्च कहाँ करें?

आज पीटीआई पर एक खबर आई कि दिल्ली में डॉग पार्लर यानी कुत्तों को सजाने-संवारने की दुकानों का चलन काफी बढ़ गया है...रईस अपने कुत्तों को इन पार्लरों में लेकर आते हैं और एक सत्र यानी एकाध घंटे के एक हजार रुपए से लेकर बीस हजार रुपए तक अपने कुत्तों पर खर्च कर ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: विचार पृष्ठ
108 views. 4.18 rating from 6 votes.

• हिमालय की गोद में

कुमाऊ एवं गढवाल क्षेत्रों के संगम से निर्मित उत्तरांचल की भूमि में पर्यटकों को प्रदान करने के अनेकों आकर्षण उपलब्ध हैं। यहाँ पर अति प्राचीन मन्दिर एवं विरासत में प्राप्त सांस्कृतिक महत्व का आनन्ददायक समाज उपलब्ध है। यहाँ पर पर्वतों, नदियों, वनों, ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: जल-जंगल-जमीन
105 views. 3.01 rating from 4 votes.