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14 मार्च, 2008

 

• हिंदी मीडिया का नया आयाम लेकिन व्यवसायिकता की कमी - भाग एक

बड़ी घोषणाओं के बाद भी काफी अखबार टांय-टांय फिस्स बोल जाते हैं

कल देश के कुछ बड़े हिन्दी अखबारों में से एक दैनिक भास्कर के डॉयरेक्टर (मार्केटिंग) गिरीश अग्रवाल की कही बात पढ़ रहा था.....कि देश में आने वाले समय में बहुत से पत्र-पत्रिकाएँ आ रहे हैं इसका मीडिया जगत को जबरदस्त फायदा मिलेगा........फिर कुछ दिन पहले (एक माह ...   और पढ़ें...
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