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20 मार्च, 2008

 

• पिता

निदा फाजली

माँ की महिमा अपरंपार होती है। माँ की ममता के बारे में हम सब जानते है...सुनते हैं.....समझते हैं लेकिन हमने पिता के बारे में काफी कम बातें की हैं....वो पिता जिसके बगैर परिवार एक दिन भी नहीं चल सकता......वो पिता जो अपने कंधों पर पूरे परिवार का बोझ लेकर चलता है....मरते दम तक.......और वो पिता जो जब तक बना रहता है पूरे परिवार को अपने सिर पर एक साया.....एक छत्रछाया सी महसूस होती रहती है......पिता का होना ही अपने आप में महत्वपूर्ण हैं....हम सब बच्चे कहीं ना कहीं अपने पिता को ही परिलक्षित करते हैं.......उन्हें अपने अंदर जीते हैं........पेश है पिता के ऊपर निजा फाजली की दिल को छू लेने वाली कविता........सचिन   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
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