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अप्रैल 2008

 

• दुनिया को भूखा देखना चाहता है अमेरिका!

राइस का बयान शर्मनाक और अमेरिकी सोच की पोल खोलने वाला है

महाबली अमेरिका की विदेश मंत्री सुश्री कोंडेलिसा राइस अश्वेत होने के बावजूद पगला गई हैं। आज ही उनका हाहाकार मचाने वाला ताजा बयान आया है............वे कहती है कि विश्व में खाद्यान्न संकट के लिए भारत और चीन जिम्मेदार हैं। भारत इसलिए कि यहाँ लोगों की खुराक ...   और पढ़ें...
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• शर्मसार होती हॉकी!

कुर्सी से चिपके रहने और बूढ़ों को ढोने से हो रही है दिक्कत

भाई लोगों सबकुछ क्रिकेटमय हुआ जा रहा है.........इस आईपीएल ने एेसी दम निकाली है कि कुछ और चर्चा ही नहीं हो रही है..........एेसे में खेल के मैदान से जुड़ी कुछ अन्य घटनाएँ भी हुईं जिन्होंने हमारी नाक कटवाई लेकिन हमने उन्हें ना तो देखने की कोशिश की और ना ही ...   और पढ़ें...
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• विश्वासघाती हरभजन!

उसका मुक्का हो या थप्पड़, देश के हजारों घंटे बर्बाद हो रहे हैं

भाई लोगों देश का मीडिया फिर पागल हो चला है...........देश की तमाम मुंह फैलाए खड़ीं समस्याओं के ऊपर उस पागल हरभजन सिंह का मुक्का (या शायद थप्पड़) भारी पड़ रहा है............उस दिन साइमंड्स पर टूट पड़ने के लिए पूर्व में मशहूर हो चुके श्रीसंथ मैदान पर बच्चों ...   और पढ़ें...
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• क्रिकेट कर रहा है देश का सत्यानाश

किसी को और किसी चीज के लिए फुरसत ही नहीं है इस मरे के मारे

अरे साहब, अब क्या बताऊँ दो दिन पहले आईपीएल को हमने खूब बुरा-भला कहा अपने इ ब्लॉग पर लिखा भी लेकिन कोऊ ने ना पढ़ा..........सोचा थोड़ा कारण ही तलाश लें......तो पता है कारण क्या निकला..............अ...   और पढ़ें...
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• आईपीएल से देश, क्रिकेट और खिलाड़ियों की थू-थू

अब परदे से मैदान पर उतर आई है नौटंकी

तो मेरी तरफ से सब दोस्तों को मुबारकबाद..............   और पढ़ें...
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• Communism

Marx and Engels

Nineteenth-century hought about social issues took a different turn with the work of such reformers as Godwin and Proudhon. The most comprehensive and influential new way of thinking about social, economic, and political issues was that developed by ...   और पढ़ें...
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• Karl Marx

(1818-1883)

Karl Marx was born and educated in Prussia, where he fell under the influence of Ludwig Feuerbach and other radical Hegelians. Although he shared Hegels belief in dialectical structure and historical inevitability, Marx held that the foundations of ...   और पढ़ें...
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• Death

Rainer Maria Rilke

Come thou, thou last one, whom I recognize,unbearable pain throughout this bodys fabric:as I in my spirit burned, see, I now burn in thee:the wood that long resisted the advancing flameswhich thou kept flaring, I now am nourishinigand burn in thee.My ...   और पढ़ें...
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• you have the courage to touch life?

MYSTIQUE OF ENLIGHTENMENT

"If you have the courage to touch life for the first time, you will never know what hit you. Everything man has thought, felt and experienced is gone, and nothing is put in its place." "Whether you are interested in Moksha, Liberation, Freedom, ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: चिंतन
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• River Vanished to Build Grand Canyon

Larry O'Hanlon, Discovery News

Forged From the Bottom Up?Before the Colorado River had a chance to carve the Grand Canyon out of the Colorado Plateau, the waterway was swallowed up by the desert and disappeared underground.A flurry of scientific papers this month have edged closer to ...   और पढ़ें...
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• युवाओं के सामने मुंह फैलाए खड़ा अपराध

बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई का फायदा उठा रही है आपराधिक दुनिया

मैं आजकल जिस शहर में रह रहा हूँ उसे लोग काफी वर्षों से एक शांत शहर मानते आ रहे थे। यहाँ तक की यह क्षेत्र भी काफी शांत माना जाता है............मेरे वर्तमान शहर का नाम इंदौर है और क्षेत्र का नाम मालवा......तो मालवा की मिट्टी को लोग यहाँ के मौसम की तरह शांत ...   और पढ़ें...
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• अपने बारे में अज्ञेय

तारसप्तक में लिखे विचार

"मैं स्वान्त:सुखाय नही लिखता। कोई भी कवि केवल स्वान्त:सुखाय लिखता है या लिख सकता है, यह स्वीकार करने में मैंने अपने को सदा असमर्थ पाया है। अन्य मानवों की भांति अहं मुझमें भी मुखर है, और आत्माभिव्यक्ति का महत्व मेरे लिये भी किसी से कम नही है, पर क्या ...   और पढ़ें...
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• बढ़ती महंगाई और सरकारी पैंतरे

नेता मानते हैं कि जनता जल्दी भूल जाती है

देश में मुद्रास्फीती की दर स्पेन के सांडों की तरह दौड़ रही है......आम आदमी की बढ़ती महंगाई से कमर टूट रही है..........दूध और पेट्रोल के साथ पानी भी महंगा हो रहा है.......दालें और सब्जियाँ खाना आम आदमी के लिए बादाम और पिश्ते खाने जैसा हो रहा है जबकि बादाम ...   और पढ़ें...
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• हम धरती को किस ओर ले जा रहे हैं?

क्या हम भूल गए कि इस धरा पर हमीं को रहना है....!!!!!!

आज एक खबर पढ़ी.........कि ७० साल बाद भारत में पानी की स्थिति काफी भयानक स्तर पर पहुँच जाएगी। इस देश का सौभाग्य रहा कि यहाँ पिछले १४० वर्षों से लगातार अच्छा पानी गिरा और पूरे भूभाग पर कई नदियां कल-कल और छल-छल करके बहती रहीं लेकिन अब वो दिन दूर नहीं जब आम ...   और पढ़ें...
श्रेणियाँ: जल-जंगल-जमीन
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• उत्तर आधुनिकतावाद और विखंडन का सिद्धांत

अब संसार का समाज किसी को बड़ा नहीं बनने देगा

आप लोगों से कई दिनों बाद रूबरू हो रहा हूँ...........खैर१९८...   और पढ़ें...
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