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8 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (2)
"मैं स्वान्त:सुखाय नही लिखता। कोई भी कवि केवल स्वान्त:सुखाय लिखता है या लिख सकता है, यह स्वीकार करने में मैंने अपने को सदा असमर्थ पाया है। अन्य मानवों की भांति अहं मुझमें भी मुखर है, और आत्माभिव्यक्ति का महत्व मेरे लिये भी किसी से कम नही है, पर क्या ... आगे पढ़ें...

देश में मुद्रास्फीती की दर स्पेन के सांडों की तरह दौड़ रही है......आम आदमी की बढ़ती महंगाई से कमर टूट रही है..........दूध और पेट्रोल के साथ पानी भी महंगा हो रहा है.......दालें और सब्जियाँ खाना आम आदमी के लिए बादाम और पिश्ते खाने जैसा हो रहा है जबकि बादाम ... आगे पढ़ें...