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5 मई, 2008


ब्लॉग्स (2)
तो दोस्तों, अपनी बात हो रही थी भारत के असल को लेकर यानी गाँवों और छोटे शहरों को लेकर..............और उनमें हो रही तरक्की को लेकर.......तो बड़े शहरों को देश का इस मायने में आईना माना जा सकता है कि दुनिया में किसी भी देश के कुछ मुख्य शहर ही अपनी पहचान बना ... और पढ़ें...

आजकल टीवी पर विज्ञापनों का दौर चल रहा है, अलग-अलग कार्यक्रमों का दौर भी चल रहा है, भारत के सशक्त ३५ करोड़ लोगों के मध्यमवर्ग के यहाँ दर्शन हो रहे हैं (उसी मध्यमवर्ग के जिसके अच्छा खाने से आजकल अमेरिका को पेट में दर्द हो रहा है)........तो टीवी पर और उसके ... और पढ़ें...