
भारत के पड़ौसी राष्ट्र म्यांमार में समुद्री चक्रवात नरगिस के कहर ने एक लाख से ज्यादा लोगों की जानें ले लीं। ऐसे में यह समझना भी जरूरी है कि ये समुद्री चक्रवात होते क्या हैं? पेश है इनसे संबंधित एक रिपोर्ट-
समुद्री तूफान जिन्हें चक्रवात भी कहते हैं, कई प्रकार के होते हैं। इनकी ताकत और बनावट पर इनके अलग-अलग नाम पड़े हैं। इन तूफानों को मुख्यतः हरीकेन या साइक्लोन कहा जाता है। हरीकेन मुख्यतः काउंटर क्लॉककवाइज घूमते हैं और मुख्यतः उत्तरी गोलार्ध में बनते हैं। इसलिए इनको ट्रॉपिक साइक्लोन्स (चक्रवात) भी कहा जाता है। इन चक्रवातों को इस तरह से बाँटा जा सकता है।
ट्रॉपिकल डिप्रेशन
इस तरह से बनने वाले साइक्लोनों में बादलों की मुख भूमिका रहती है। ऐसे तूफानों की गति 38 मील प्रति घंटा
(33 नॉट) या उससे कम होती है।
ट्रॉपिकल स्टार्म (तूफान)
यह तूफान बिजली और जबरदस्त गति के साथ आगे बढ़ते हैं। इनकी ताकत का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनकी गति 39 से 73 मील प्रति घंटा (34-63 नॉट) होती है।

हरीकेन
समुद्री चक्रवाती तूफानों में हरीकेन सबसे अधिक डराने वाला तूफान होता है। इसकी संरचना निर्धारित होती है और यह अपने निर्धारित रास्ते पर ही आगे बढ़ता है। इसकी ताकत अपार होती है और अमेरिका में इसने अभी तक सबसे अधिक तबाही मचाई है। कैटरीना और रीटा पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में आए प्रसिद्ध हरीकेन हैं जिन्होंने उस विकसित देश में भी तबाही का मंजर दिखा दिया था। हरीकेन की गति 74 मील प्रतिघंटा (64 नॉट) तक हो सकती है। पश्चिमी उत्तर पेसिफिक क्षेत्र में हरीकेन को टाइफून कहा जाता है जबकि हिन्द महासागर में आने वाले हरीकेन साइक्लोन के नाम से जाने जाते हैं।
अगर समुद्री चक्रवातों की विवेचना की जाए तो ट्रॉपिकल डिप्रेशन और ट्रॉपिकल स्टार्म (तूफानों) को हरीकेन से कम विनाशकारी माना जाता है लेकिन ये तूफान भी काफी तबाही और जनहानि करते हैं। हालांकि पहले दो तरह के तूफानों की गति उतनी हानिकारक नहीं होती जितनी की हरीकेन की होती है। लेकिन इन तूफानों के साथ होने वाली भारी बारिश, बाढ़ और मौसम की भयंकर गतिविधियाँ जरूर विनाशकारी भूमिका निभाती हैं। इसलिए ऐसे तूफानों से भी मानवजाति जब-तब परेशानी में पड़ती रहती है। एक अध्ययन के मुताबिक एटलांटिक महासागर, कैरेबियन सागर और मैक्सिको की खाड़ी में हर वर्ष 10 ट्रॉपिकल तूफान बनते हैं जिनमें से 6 हरीकेन होते हैं। पिछले तीन वर्षों में अमेरिकी समुद्री रेखा पर पाँच बार हरीकेनों ने हमला किया जिनमें से दो सबसे अधिक विनाशकारी साबित हुए।

हरीकेन से होने वाले नुकसान-
समुद्र हो जाता है बेकाबूः
ऐसे तूफानों के आने से मर्यादाशील माने जाने वाले समुद्र का पैमाना भी छलक जाता है और उसकी अथाह जलराशि
बाहर आ जाती है। इससे आस-पास के इलाके डूब जाते हैं। कई तटीय क्षेत्रों में जलस्तर 15 फीट या उससे अधिक तक बढ़ जाता है।
बाढ़-
पिछले 30 वर्षों में समुद्री तूफानों की वजह से आने वाली बाढ़ ही विनाश का मुख्य कारण रही है। इन तूफानों में मारे जाने वालों की कुल संख्या में से आधी इस बाढ़ का ही शिकार हुई है।
तेज हवाएँ-
हरीकेन जो तेज हवाएँ उत्पन्ना करता है उसके सामने पुरानी इमारतें ठहर नहीं पातीं और गिर जाती हैं। इसके अलावा हल्के मकान मसलन लकड़ी या अन्य सामान्य सामान से बने मकान भी इस तूफान के आगे ठहर नहीं पाते। मकान के मलबे से निकला हल्का सामान हरीकेन की चपेट में आ जाता है और उसके साथ-साथ घूमता रहता है। यह सामान उड़ती हुई मिसाइलों का सा काम करते हैं और जिससे टकराते हैं उसका बहुत नुकसान करते हैं।
टोरनेडो-
हरीकेन से ही टोरनेडो बनते हैं जो तूफान को अधिक विनाशकारी ताकत देते हैं। टोरनेडो हरीकेन के सीधी तरफ का एक चौथाई हिस्सा होता है जो आगे की तरफ बनता है।

हरीकेन के नामों का इतिहास-
हरीकेन का नाम रखने की परंपरा कई शताब्दियों से चली आ रही है। वेस्ट इंडीज में इनके नाम संतों के नाम पर रख दिए जाते थे। एक आस्ट्रेलियन मौसम विज्ञानी क्लीमेंट व्रेज ने उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में सबसे पहले हरीकेनों के नाम महिलाओं के नाम पर रखने की शुरुआत की जो अब तक चली आ रही है। हालांकि 1953 में अमेरिका ने कई हरीकेनों के नाम महिलाओं के नाम पर दिए गए थे लेकिन यह चलन व्यापक नहीं था। बाद में 1978 और 1979 में पूर्वी उत्तर एटलांटिक महासागर में आने वाले समुद्री तूफानों में से कई के नाम पुरुषों पर भी रखे गए और आज भी रखे जाते हैं।
क्यों रखे गए नाम?
वैज्ञानिकों का अनुभव है कि छोटे नाम किसी भी समुद्री तूफान को लंबे समय तक याद रखने के लिए उपयोगी साबित होते हैं। उनके अनुसार अगर यह नाम महिलाओं के ऊपर हों तो लोगों की याददाश्त में और भी अधिक समय तक रहते हैं।
हरीकेनों के कुछ प्रसिद्ध नाम
2006- बर्टो, बेरल , क्रिस, फ्लोरेंस, हेलन, टोनी, सैंडी आदि
2007- एनड्रिया, बैरी, डीन, ओल्गा, तान्या, वेन्डी, पाब्लो, मेलिसा आदि
2008- बर्था, डौली, हन्ना, सैली, पलोमा, रीनी, सैली, विकी,, नरगिस आदि
अभी तक के दस सबसे ताकतवर और विनाशकारी हरीकेनों के नाम, वर्ष और उनसे हुए नुकसान का आकलन-
नाम वर्ष नुकसान
जार्जस 1998 2.4 अरब डॉलर
एन्ड्रुयू 1992 1.8 अरब डॉलर
ह्यूगो 1989 1.3अरब डॉलर
फ्लोयड 1999 88 करोड़ डॉलर
फ्रान 1996 63करोड़ डॉलर
मारिलन 1995 48 करोड़ डॉलर
होरटेंस 1996 29 करोड़ डॉलर
इनिकी 1992 25 करोड़ डॉलर
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