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7 जुलाई, 2008


ब्लॉग्स (1)
दोस्तों, कल चूँकी बात अधूरी रह गई थी इसलिए पुनः हाजिर हूँ। बात धर्म और उसके प्रसार के लिए किए जाने वाले प्रयासों की हो रही थी। धर्म गुरूओं ने तो शायद इतना कोहराम नहीं मचाया होगा जितना कि उनके अनुयायियों ने मिलकर मचा दिया, तो बात आगे बढ़ाई जाए.....।अपनी ... आगे पढ़ें...