असम से होकर बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी और उसके बेसिनों में मीठे पानी यानी नदी जल की डॉल्फिनें पाई जाती हैं। भारत में डॉल्फिन की इस प्रजाति को 'गैंजेटिक डॉल्फिन' कहा जाता है। इनका यह नाम प्रसिद्ध नदी गंगा में पाए जाने के कारण पड़ा है। वैसे डॉल्फिन की यह प्रजाति उत्तर भारत तथा उत्तर-पूर्व की कई सारी नदियों में पाई जाती है। असम में इन्हें 'शिहू' कहा जाता है। इस महत्वपूर्ण जलचर को बचाने के लिए राज्य की तरुण गगोई सरकार ने इस डॉल्फिन को 'एक्वेटिक स्टेट एनिमल' (प्रादेशिक जलचर प्राणी) घोषित किया है। सरकार का सोचना है कि उसके इस कदम से इस अद्भुत प्राणी के अवैध शिकार पर और लगाम लगेगी। अब सरकार कह रही है कि वह नदियों के उन क्षेत्रों को जहाँ ये डॉल्फिन पाई जाती है संरक्षित करेगी ताकि उनकी संख्या में इजाफा हो सके।
उल्लेखनीय है कि डॉल्फिन से निकलने वााले तेल में कई औषधीय गुण होते हैं जो इसकी जान के दुश्मन भी बने हुए हैं। इस बारे में डॉल्फिन फाउंडेशन के सुजीत बैरागी कहते हैं कि इस जीव को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है जिससे अभी तक सरकार बचती रही है। डॉल्फिन की संख्या कम होने की मुख्य वजह शिकार ही है जिसपर अभी तक काबू नहीं पाया जा सका है। वैसे कई बार यह मछली अनचाहे मछुआरों के जाल में फँस जाती है जबकि मछुआरे उसे पकड़ना नहीं चाहते हैं। लेकिन इस चूक से भी आखिर डॉल्फिन को तो जान से हाथ धोना ही पड़ता है।
बैरागी लंबे समय से इस प्रदेश में डॉल्फिनों को बचाने के लिए अभियान चला रहे हैं। वे सरकार से मांग करते हैं कि इस जीव की जब तक अच्छे तरीके से मॉनिटरिंग नहीं होती तब तक इसे बचाए रखना मुश्किल है इसलिए सरकार को इसकी मॉनिटरिंग के व्यापक इंतजाम करने चाहिए।
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