दोस्तों, यूपीए क्लीयर तौर पर आ गई है। उसे ना मायावती की जरूरत है, ना मुलायम की और ना लेफ्ट की...आडवाणी, नरेन्द्र मोदी, अरुण जेटली सब एक तरफ गए। ....कांग्रेस को समर्थन करने वाले सब खुश हैं लेकिन मैं चिंतित हूँ कि कहीं पेट्रोल, दाल, चावल, आटा कहीं 100 रुपए लीटर या किलो ना हो जाएँ, चिदंबरम-मनमोहन कुछ और टैक्स ना लाद दें, लेकिन गलती हमारी ही है.....कम वोट प्रतिशत लगभग 50 फीसदी (भारत भर में) से ही समझ आ गया था कि कांग्रेस को फायदा मिलेगा, बुद्धिजीवी लोग कमरों में बैठकर बौद्धिक मैथुन (मंथन नहीं) करते रहे और थैले में बम फोड़ते रहे वहीं दूसरी ओर धूप में लंबी कतारों में वोट देकर आया देश का निचला तबका फिर से गाँधी-नेहरू परिवार की जय कर गया। आखिर हो भी क्यों ना, हमने बरसों गुलामी में बिताए, राजे-रजवाड़ों के पैरों तले रहे और कई शताब्दियों तक उनके शासन को ही स्वीकारा। उस आदत की जीत हुई।
दोस्तों, फिर से मेरे साथ बोलो, गाँधी-परिवार की जय...सोनिया मैया की जय..जय...जय हो।
- सचिन
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