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क्या करें हम इस थरूर और मायावती का?

ये लोग देश और यहाँ की जनता को कुछ नहीं समझते

मित्रों, हमारे देश के गिरगिट नेता रोज नए-नए रंगों में सामने आते हैं। मैं खुद भी अचंभित रह जाता हूँ कि क्यों कोई डिसकवरी या एनिमल प्लेनेट चैनल यहाँ आकर इनपर फिल्में नहीं बनाता..?? अरे भाई, ये तो अनोखे जीव हैं...इनकी रंग बदलने की क्षमता का क्या कहना, गिरगिट भी शरमा जाए। तो सबसे पहले बात शशि थरूर पर..।

शशि थरूर ने क्या कहा ये बताने की जरूरत नहीं...आप सब लोग सुधिजन हैं और सब लोग अखबार, इंटरनेट और न्यूज चैनल देखते हैं। लेकिन ब्रीफ में बस इतना ही कि पिछले तीन माह से फाइव स्टार होटल में टिके (जिसे बाद में उन्होंने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के कहने पर छोड़ा) भारतीय राजनीति के नवे-नवे राजनीतिज्ञ शशि थरूर का दिमाग अचानक फिर गया। वो जानते हैं कि जबान से निकले शब्द कभी वापस नहीं लौटते, बावजूद इसके उनकी जबान फिसल गई और जो फिसली तो उसके घेरे में भारत की जनता के साथ-साथ सर्वशक्तिमान सोनिया गाँधी और युवराज राहुल गाँधी भी आ गए। ऐसा क्या कह दिया था थरूर ने...?? तो एक अंग्रेजी पत्रकार ने शशि थरूर से सोशल नेटवर्किंग साइट “ट्विटर” पर व्यंग्य में पूछा कि क्या वे भी अब हवाई सफर की “कैटल क्लास” (इकोनोमिक क्लास) में यात्रा करेंगे जिसके जवाब में थरूर ने सार्वजनिक जवाब दिया-“ हां बिल्कुल, अपने साथ की सभी पवित्र गायों के साथ एकता दिखाते हुए अब मैं भी ‘मवेशी श्रेणी’ में यात्रा करूंगा। इन पवित्र गायों से उनका मतलब उनके साथी मंत्री थे और इत्तेफाक से सोनिया और राहुल भी पवित्र गायों की श्रेणियों में आ गए। कांग्रेस ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की और इस बयान से अपने को अलग कर लिया। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने ही अपने मंत्रियों को इकोनॉमी क्लास में सफर करने की सलाह दी थी। फिलहाल थरूर अफ्रीकी देशों लाइबेरिया और घाना की यात्रा पर हैं और लौटने पर ही पता चलेगा कि उनका क्या हश्र होगा। लेकिन इन बातों से कुछ तथ्य तो बिल्कुल साफ हो गए हैं।

सबसे पहला यह कि यह थरूर भूरी चमड़ी में एक गोरा शख्स है जिसे अपने भारतीय होने पर ठीक उसी प्रकार से अफसोस है जैसा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू को हुआ करता था। फटाफट अंग्रेजी बोलने वाले थरूर के साथ दूसरी दिक्कत यह है कि उसने हमेशा से विदेशों में काम किया है, लंबे समय तक संयुक्त राष्ट्र का अंडर सेक्रेटरी रहा है और वो भारत तथा यहाँ की जनता को नहीं समझता। मुझे लगता है कि यह आदमी जब किसी भारतीय ट्रेन की जनरल बोगी में सफर करेगा तो वहाँ सफर कर रहे लोगों को क्या कहेगा..?? इनसेक्ट (कीट) क्लास..??
क्योंकि हवाई सफर तो पहले से ही एलीट वर्ग के लिए माना जाता है और इकोनोमिक क्लास के लोगों को यह मवेशी बोल कर जतला चुके हैं कि वो भारतीय जनता को क्या समझते हैं। मुझे कुछ पुरानी बातें याद आ रही हैं। जब ये शख्स संयुक्त राष्ट्र में अंडर सेक्रेटरी था तब मैं इसके इंटरव्यू सुनकर बड़ा आल्हादित हुआ करता था। मुझे लगता था कि वाह, एक भारतीय संयुक्त राष्ट्र के इतने ऊँचे ओहदे पर है। फिर पिछली बार जब यह संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद पर लड़ने के लिए नामांकित हुआ तब भी मुझे लगता था कि हमें इसका सपोर्ट करना चाहिए। कांग्रेस सरकार की वजह से इन्हें पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया और ये महासचिव बनने से रह गया और दक्षिण कोरिया के बान की मून महासचिव बने तब मुझे बहुत निराशा हुई थी। लेकिन आज मैं खुश हूँ कि अच्छा ही है जो ये आदमी उस पद तक नहीं पहुँच सका। जो व्यक्ति अपनी मातृभूमि और वहाँ के बाशिंदों का आदर करना नहीं जानता वो दुनिया से क्या प्यार करेगा और उस पद पर रहते हुए भारत का क्या भला करेगा। थरूर को उसके किए की सजा मिलनी चाहिए। हमें भूरी चमड़ी के नीचे छिपे हुए गोरे आदमी नहीं चाहिए। हमें प्योर भारतीय व्यक्ति ही अपने देश में शासन चलाने के लिए चाहिए। थरूर को उसके बोले की सजा मिलनी चाहिए। वो भारत का कतई भला नहीं कर सकता।

... दोस्तों, इसी संदर्भ में मुझे एक भारतीय राजकुमारी की भी अचानक याद हो आई। यह राजकुमारी अमर होने के अथक प्रयास कर रही है। करोड़ों रुपए खर्च करके अपनी मूर्तियाँ बनवा और लगवा रही है। ये हमारे देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती है। अरे, आप लोग सोच रहे होंगे कि मैंने मायावती का इंट्रोडक्शन इतने ड्रामेटिक अंदाज में क्यों करा, तो पहले यह पढ़िए..

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को चेतावनी दी और कहा कि बसपा के सत्ता से जाने के बाद भी कांशीराम समेत अन्य (खुद मायावती) दलित महापुरुषों की मूर्तियों को तोड़ने की गलती न करें नहीं तो इसके गम्भीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कांग्रेस के कुछ नेता और सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कह रहे हैं कि उनकी सत्ता आई तो मूर्तियों पर बुलडोजर चला दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “भूल से ऐसी गलती कोई न करें नहीं तो देश में गृहयद्ध की स्थिति हो जाएगी।” उन्होंने कहा कि मूर्तियों से छेड़छाड़ होने पर पूरे देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ेगी। देश में आग लग जाएगी।”
अम्बेडकर पार्क समेत अन्य स्मारकों और मूर्तियों के निर्माण पर उच्चतम न्यायालय के रोक के बाद सपा और कांग्रेस ने इस मामले में मायावती पर हमले तेज कर दिए थे। गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो मूर्तियों पर बुलडोजर चला दिया जाएगा।


पढ़ा दोस्तों, तो देश में गृहयुद्ध के लिए अन्य हालातों की जरूरत ही नहीं है। मायावती अपनी मूर्तियाँ तुड़वाने पर ही देश को गृहयुद्ध की आग में झोंक देंगी। देश में आग लगवा देंगी। मैं कहता हूँ कि ऐसी महिला पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए। इसे सार्वजनिक रूप से जेल में डाल देना चाहिए और इससे भी सब्र ना हो तो इसे ही क्यों नहीं जिंदा आग में झोंक देना चाहिए? देश को ऐसे नालायक नेताओं की जरूरत ही नहीं है। और यहाँ मैं माफी माँगकर कहना चाहूँगा कि उत्तरप्रदेश के नागरिकों को भी इस नालायक महिला के साथ सजा देना चाहिए जो इसे हर बार चुन लेते हैं। क्या उन्हें नहीं पता कि अमर होने वाले व्यक्तियों की मूर्तियाँ दुनिया सदियों तक खुद ही बनवाती रहती है। उन्हें खुद अपनी मूर्तियाँ बनवानी की जरूरत नहीं पड़ती। जनता की गाढ़ी कमाई से ये महिला जो खिलवाड़ कर रही है उसकी सार्वजनिक निंदा की जानी चाहिए और हर बसपा नेता और कार्यकर्ता को जनता को कटघरे में खड़ा करके पूछना चाहिए कि भईया ये तुम्हारी बहनजी हमारी जान लेंगी क्या, वो पागल हो गई हैं क्या, नहीं देखनी हमें उनकी मनहूस शक्ल और मूर्तियों के रूप में दशकों तक उसे कौन झेलेगा...बंद करो ये अंधेरगिर्दी....अगर यह सब अभी बंद नहीं हुआ तो अंदर से कमजोर समझकर हमारे ताकतवर दुश्मन तुरंत हमारा सफाया कर देंगे फिर देखते हैं कि कहाँ जाती हैं तुम्हारी मूर्तियाँ और 'कैटेल क्लास' कहने वाली एलिट मैंनटेलिटी...!!!!!!!

आपका ही सचिन....।

प्रतिक्रियाएँ

Re: क्या करें हम इस थरूर और मायावती का?
Dear Sachin, Welldone Lots of Thanks for Your Indian(Nagrik), I am very peroud of You Your Friends, Bijay Kumar. Madhubani,(Bihar)
Re: क्या करें हम इस थरूर और मायावती का?
in kutto/kutti ko to goli mar de ya sare aam phasi par latka de
Re: क्या करें हम इस थरूर और मायावती का?
What to say for you topic. I am really wordless. In this way if every indian will think then i am sure we will make our country on top. Dhanyawad Sahit, Sanjeev Sharma
Re: क्या करें हम इस थरूर और मायावती का?
plz dnt blame uttar pradesh people only. I dnt know from which state u r and i also dnt want to know but uneductaion and casteism are not the only reason behind Mayawati's repeated victory. She purchases our most prestiagous civil servant for the victories in the several territories of Uttar Pradesh. Alas!! on our administration those who took the pledge to save the country are the one who rape it most
Re: क्या करें हम इस थरूर और मायावती का?
sachin ji, to save our country from these dirty politisians eg mayawati and other we must ensure that we all educated class people vote in election . because leaders like mayawati, lalu, paswan can fool the uneducated class of peoples in the name of cast and leaders from these class do not have capability to analyse these leaders .but we people do not vote some times due to shortage of time,bussiness .in my support i say that these leaders choose their constuency in election for remote villages and fool the villagers by money, drinks( sharab, alkohal ) . but it is sure they will never win any election in cities( where mostly sensible, educated people live).
Re: क्या करें हम इस थरूर और मायावती का?
are mere bhai, ye mayawati jaison ke kahane se aisa kuchh ho sakata to ye karva bhee detee. ye SC/ST ko to bhonkane do Dont worry. Law and order of nation will take action against them.
Re: क्या करें हम इस थरूर और मायावती का?
माया वती के बारे में विचारों से में पूरी तरह सहमत हू यह देश और ख़ास तौर से उत्तर प्रदेश की जनता की बुध्धि हीनता है कि मायावती जैसा कोई नेता प्रदेश की मुखिया हो सकती है. मायावती को एक भी वोट देना देश के साथ गद्दारी करना है. उनकी सही जगह सिर्फ़ और सिर्फ़ सलाखों के पीछे है .
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