Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!

देश को तोड़ने वाला गुंडा मराठी नहीं हो सकता

दोस्तों, करण जौहर के राज ठाकरे से माफी माँगने की खबर लगभग हर अखबार और समाचार चैनल ने दी। पढ़कर बड़ा क्षोभ हुआ। क्योंकि करण पर आरोप था कि उनकी फिल्म वेकअप सिड में बंबई या बॉम्बे शब्द का 11 बार इस्तेमाल हुआ था। राज ठाकरे को यह बुरा लगा था कि उसकी मुंबई को किसी ने बंबई क्यों बोल दिया। हालांकि इस इश्यू पर अपना बयान देते हुए उनकी पार्टी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के ही एक नेता ने बंबई (बॉम्बे) शब्द का प्रयोग कई बार कर दिया लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। दरअसल, ऐसा नहीं है कि मैं करण जौहर को पसंद करता हूँ, ऐसा भी नहीं है कि मैं उसकी सभी फिल्में देखता हूँ। मुझे करण जौहर या उसकी एनआरआई टाइप फिल्मों से कोई मतलब नहीं है। बल्कि मैं करण की फिल्मों के विषयों को पसंद नहीं करता, लेकिन एक हिन्दुस्तानी होने के नाते मैं इस मामले में करण जौहर के साथ खड़ा हूँ। इसका कारण साफ है कि जब आस्ट्रेलिया में दिनोंदिन भारतीयों के पिटने की खबर आती है तो मेरा खून खौल जाता है, लेकिन राज ठाकरे के बारे में सोचकर ठंडा भी हो जाता है। अरे, हम या हमारी सरकार किसी दूसरे देश को भारतीयों को पीटने से रोकने के लिए कैसे बाध्य कराएगी जब हमारे खुद के ही देश में भारतीय पिट रहे हैं, जलील हो रहे हैं और राज्य तथा केन्द्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

साथियों, राज ठाकरे दरअसल एक बहुत बड़ा नासूर है हमारे देश के लिए, हमारे समाज के लिए। मैं उसे मराठी नहीं मानता क्योंकि जिस महाराष्ट्र ने हिन्दुत्व की अवधारणा रची, जिस महाराष्ट्र ने वीर शिवाजी और बाल गंगाधर तिलक जैसे लोग निकाले। जहाँ से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा देशभक्त और क्रांतिकारी मूवमेंट शुरू हुआ उस महाराष्ट्र से कैसा जानवर निकल आया जो अपने भाईयों को ही एक दूसरे से लड़वा रहा है, झगड़वा रहा है। मुंबई हमले के समय राज ठाकरे की असलियत सबसे सामने आ गई थी जब उसके समेत उसके दल के सारे चूहे दुम दुबाकर आठ दिन तक अपने-अपने बिलों में छुपे रहे। लेकिन आश्चर्य है कि उस घटना के बाद, और उसकी असलियत सामने आने के बाद भी उसकी घातक राजनीति चल रही है। मुझे इस बात का भी आश्चर्य है कि मराठी लोग उसे कैसे सहन कर रहे हैं। मैं मराठियों को हमेशा बहुत ऊँची नजर से देखता हूँ। मैंने जिस स्कूल से पढ़ाई की है वो मराठी स्कूल था। स्कूल का पूरा स्टाफ मराठी था। हम लोग अपनी टीचर को ताई बुलाते थे। उस स्कूल में हमें बहुत अच्छे संस्कार दिए गए। इतने अच्छे कि हम सब दोस्त उन दिनों को 16 साल बाद आज तक याद करते हैं। आज हम दोस्तों में से कई विदेश में हैं, कई दूसरे देश के कोने-कोने में हैं लेकिन हम उन संस्कारों को नहीं भूले। मेरे सभी मराठी मित्रों ने अपने परिवार और देश के साथ पूरी ईमानदारी से अपना रिश्ता और जिम्मेदारी निभाई है। संगीत और कला के प्रति समझ और प्रेम मराठियों में जन्मजात होता है। वे संस्कृति प्रेमी, देशभक्त और वीर होते हैं। अपनी मातृभाषा के प्रति उनके मन में गजब का सम्मान होता है। भारत के सभी बौद्धिक मूवमेंट या तो महाराष्ट्र से शुरू हुए या बंगाल से। बंगाली लेफ्टिस्ट निकले तो मराठी राइटिस्ट लेकिन दोनों बौद्धिक लोग हैं। लेकिन पहली बार मैं एक गुंडे को मराठियों का प्रतिनिधित्व करते हुए देख रहा हूँ। यह प्रतिनिधित्व उसे किसने दिया यह मैं नहीं जानता लेकिन इतना जानता हूँ कि वो लगातार ये काम कर रहा है।

दोस्तों, मराठियों की ऐसी ओछी सोच के बारे में मैं सोच भी नहीं सकता जिसमें वे सिर्फ अपने लोगों और अपने प्रदेश के बारे में सोचें लेकिन राज ठाकरे को रोकने के लिए ना तो महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार कुछ कर रही है, ना ही कोई दल कुछ कर रहा है और वहाँ की जनता भी शांत है। शिवसेना जो कह रही है वो इसलिए ज्यादा मायने नहीं रखता क्योंकि उसने भी अपनी जमीन इसी नफरत पर तैयार की है। लेकिन है यह सब बहुत घातक। हम बिहार को पिछड़ा प्रदेश कहते हैं क्योंकि वहाँ जातिवाद इतना हावी हो गया है कि वहाँ सीधे ही वर्ण व्यवस्था को निशाना बनाया जाता है। वहाँ दलितों के गैंग सवर्णों को मार डालते हैं और सवर्णों के गैंग दलितों की हत्या कर देते हैं। क्या राज ठाकरे द्वारा तैयार की गई जमीन पर भी भविष्य में ऐसा ही होगा और मराठी गैर मराठियों की हत्या कर देंगे और जब गैर मराठियों की बारी आएगी तो वे मराठियों को जिंदा नहीं छोंड़ेंगे।

आपमे से जो विद्वान हैं वो अफ्रीका के बारे में जरूर कुछ ना कुछ पढ़े होंगे। वहाँ सिविल वॉर से घिरे देशों में वही हालात हैं जो राज ठाकरे हमारे देश में करने की सोच रहा है। अफ्रीका में रेबेल्स ग्रुप ऐसे ही एक दूसरे के सिर काटते रहते हैं। क्या राज ठाकरे महाराष्ट्र को अफ्रीका के ऐसे ही किसी देश जैसा बनाना चाह रहा है। मुझे नहीं लगता कि महाराष्ट्र कभी गैर मराठियों से खाली हो पाएगा, तो ऐसे मामले में क्या होगा..?? राज ठाकरे की शक्ल धीरे-धीरे शैतान की शक्ल जैसी होती जा रही है और उसकी गुंडों-मवालियों की सेना महाराष्ट्र का नवनिर्माण नहीं बल्कि उसका नाश करने जा रही है। राज जानता है कि उससे नफरत करने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है लेकिन उसे फिर भी यकीन है कि मराठियों का साथ उसे मिल रहा है, शायद यह सच हो लेकिन अगर ऐसा है और राज ठाकरे अपनी इस शैतानी मुहिम में कामयाब हो गया तो पूरे देश के हर राज्य में ऐसी मुहिमें चलेंगी और देश की अस्मिता दाव पर लग जाएगी।

अब जबकि हमारे देश में नियम-कायदे और कानून की पालना में सरकारें और नेता फेल हो चुके हैं, ऐसे में हमें महाराष्ट्र के मराठी बाशिंदों से ही उम्मीद करनी होगी कि वे इस शैतानी मुहिम को खत्म करें। राज हमेशा लाइमलाइट में आने के लिए फिल्म और फिल्म से जुड़े लोगों को निशाना बनाता है। बच्चन परिवार के बाद अब बारी करण जौहर की है। महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार हमेशा की तरह चुप है क्योंकि उसे लग रहा है कि इन घटनाओं से राज का जनाधार बढ़ेगा और वो आगामी विधानसभा चुनावों में शिवसेना और भाजपा के वोट काटेगा जो कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा होगा। ऐसा इसी देश में हो सकता है कि तुच्छ चुनावों और सत्ता सुख के कारण देश को बाँट-काट-छाँट भी दो तो चलता है। यह देशद्रोही मुहिम सिर्फ और सिर्फ मराठियों की वजह से ही रुक पाएगी, जब वे राज ठाकरे का समर्थन करना बंद कर देंगे और ओछी राजनीति को एक तरफ कूड़े में फैंक देंगे। पूरा देश महाराष्ट्र के मराठियों की ओर देख रहा है। उन्हें यह साबित करना होगा कि राज ठाकरे मराठी नहीं है और मराठी संस्कारों में ऐसी देशद्रोही राजनीति नहीं आती, तभी यह विष बेल फैलने से रुकेगी अन्यथा भविष्य में हम सबको इस जहरीली बेल के फैलने की कीमत चुकानी होगी।

आपका ही सचिन...।

प्रतिक्रियाएँ

Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
I think normal people avoid such a polytics incidenet in life and that's why we (normal peopel) just are watching these things..
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
सचिनजी आप कौन हो पता नही...पर कुछ लिखते समय उस विषय का कुछ ज्ञान होना चाहीये. आपने मन मे कुछ द्वेष रखकर लिखना नही चाहीये. मुंबई मे सिर्फ मराठी लोग नही रहते. वहापर बडी संख्यामे गुजराती लोग भी है. बंगाली, दक्षिण भारतीय भी मुंबई मे रहते है. राज ठाकरे उनको कुछ नही कहते...क्यो यह सोचने की बात आहे. क्यो की वो लोग महाराष्ट्र की संस्कृतीसे समरस हो गये है. वो लोग आपने उद्योग, व्यापार मे मस्त है. उनको राजनीती नही करनी. पर बिहार और उत्तरप्रदेश के लोग मुंबई मे आकर गुंडागर्दी कर रहे है. उनके एक नेता संजय निरुपम उत्तर भारतीय लोगो के लिये महाराष्ट्र विधानसभा मे 35 सीट आरक्षित करने की मांग कर रहै है. छटपूजा के बहाने आपनी ताकद बता रहे है. उत्तर प्रदेश दिन मुंबई मे मना रहे है. इन बातो का राज ठाकरे का विरोध आहे. आप मध्यप्रदेश के होंगे. वहा के लोगे के बारे मे राज ठाकरे ने कुछ कहा था क्या? क्यो की गुजरात, बंगाल, मध्यप्रदेश....आदी राज्य के लोग वहा राजनीती नही कर रहे है. हम सभ भारतीय है. हम कही भी जा आ सकते है. पर आप जहा रह रहे हो उस कर्मभूमी के बारे में सोचना चाहीये. उस भूमी के प्रगती आपना हिस्सा ‍देना चाही. न वाहा गुंडा गर्दी करणा चाहिये. आपने बीग बी अभिताभ बच्चन कर्मभूमी मुंबई है. पर हमेसा उनकी सौच उत्तर प्रदेशके लिए होती है. कभी मुंबई के लिए उन्होने कुछ किया है क्या....
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
aap jo bhi he, sach hi kaha he aapne, iss jati wad ko sirf marathi hi rok sakte he, apna samarthan na dekar, par ek bat aur bhi sach he ki vo aisa nahi karenge, kyonki unki soch kue ke medak jasi ho gayie he, vo sirf apna kuaa (maharastra) dekh rahe he unhe kisi aur ki na to parvah he na desh ki pragti ki, vo sirf apni hi pareshaniya dekh rahe he jaise ki rahvas, naukri, ityadi ityadi, ye sirf vo hi chunninda log he jo shayad apne maharashtra se kabhi bahar gaye hi nahi, ya phir jane ki sochte hi nahi, unhe bahar aaker dekhna chahiye ki desh ki pragti ke liye unke sahi kartavya kya he, aur agar bahar nahi aa sakte he to cum se cum unhe apni soch viksit kar leni chahiye ... ho sakta he ki unhone iss desh ko kuch samjhane ki kosis ki ho aur usme kuch had tak vo safal bhi hue he, parantu ye deshvyapi mudda nahi he, desh ko jo sunna tha samajhna thva vo samajh liya gaya he, ab unhe isse aur tule nahi dena chahiye, me to bas yahi kahna chahunga - stop thinking like kue ka madak... saari dunia sirf maharashtra tak hi simit nahi he.... aapka - Abhishek Sahu
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
सचिन... ji आप ने जो भी कहा सही ही कहा है अब राज जी के बारे में में और क्या कहूँ बड़ी ही महान आत्मा है मराठा राजा है ये अरे ये लोग तो शिवा महाराज कि जूते के बराबर भी नही है ये राज और एंके जैसे दो और ठाकरे..!! जाने दीजिये में तो कहूँगा कि अब हमें जी कुछ सोचना होगा कयोकि एकजमाने में हिंदू और मुस्लिम का बीगुल उत्तर प्रदेश में बजा था और देश में और आज तक कई परिवार उसका हर्जाना भुगत रहे है ये भी काम एसि राज और एस्के जैसे दो और ठाकरे.. का ही था और अब वो उत्तर भरितिय और मराठी के बीच लदायि करना चाहते है पर हम इनकी ये मनसा नही पूरी होने देंगे इस बार एक भी वोट राज ठाकरे को ना मिलें ऐसा ही करना होगा हमें तो ही सही होगा !!
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
अगर राज जी को फिक्र है महाराष्ट्र कि तो जाए जरा लालू और मुलायम और मायावती से आमने सामने मार करे पर नही वो तो एक आम आदमी को मार रहे है .................... to aap ye kahana chahte hai ki ye jo raj jji kar rahe hai wo sahi hai chaliye hum maan lete hai ab se ek kaam karo aap ki delhi waale mumbai waale ko maare aur mumbai waale delhi waale ko maare aur baaki sabhi pradesh bhi yahi sooru kar de to to india ko maratha par bahoot hi maan mahsoos hoga are aap ko maratah ke baare mai nahi pata saahab pata nahi aap maraatha ho bhi ki nahi maratha ka matalab maan hota hai sanmaan hota hai ek गर्वे का नाम है मराठी समाज पर अगर ऐसा ही चलता रहा तो ज्यादा दिनों तब भारत देस का मन सन्मान जरूर घट जाएगा सचिन जी को क्या पता कि मुम्म्बै के बारे में मालूम कम है या नही पर आप को जरूर कम मालूम है मुंबई के बारे में मुंबई आज इतना आगे है वहा कम कर रहे एक एक एक आदमी कि वजगह से किसी नेता कि वगह से नही जानी और हा राह गयि बात उप कि बिहार कि तो वहा के लोग बुरे नही है मालिक वो भी चाहते है कि वो आगे बड़े कुक्जह नाम करे लकिन यही राजनीति जो आज महाराष्ट्र में हो रही है वासी ही राजनीति वहा पर 1950-1960 से ही चल रही है जिसकी वजह से वो आज ये प्रदेश पीछे है और अगर महाराष्ट्र में भी अगर ऐसे राज्नीतो को नही रोका गया तो एन्का भी मन hoga ki ye कुछ भी करेंगे उनके लिय्रए कोई भी क़ानून नही रहे गा आप इस बात कओ तो समझिये में मन रहा हूँ कि मराठी समाज एक बड़ा समाज है पर एस्का मतलब है किराज जैसे नेता एस्का phayada उठा कर अपनी जेब भरे rahe hai आप को एक बात और भी बता दो कि एक राज जी का एक business partner ek up waala hi hai jara bolo ki parter change kar de aap log is baat ko samjho aur mai to kahunga ki koi neta agar hinsa karta hai to wo sahi nahi hai. bas aur
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
पहली बात तो ये है कि‍ बम्‍बई को मुंबई नाम राज ठाकरे ने नही सरकार ने दि‍या है। अगर कि‍सी शहर को गलत नाम से पुकारा जाए तो यह गलत है। और गलती कोई भी हो उसे सुधारा जाना चाहि‍ए। और अगर सुधारा ना जा सके तो माफी तो मांगनी ही चाहि‍ए।
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
अगर नाम सरकार ने बदला है तो राज ठाकरे को करन जौहर के खिलाफ सरकार से शिकायत करनी चाहिए... गुंडा गरादी का हक उन्हें नही है
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
राज ठाकरे ने करण जौहर के खि‍लाफ जो कि‍या उससे आपको इतना गुस्‍सा आ रहा है और करण जौहर कभी अलवि‍दा ना कहना जैसी फि‍ल्‍में बनाकर जो असंस्‍कृति‍ फैला रहे हैं उसके खि‍लाफ तो आप कभी नहीं लि‍खते।
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
मुंबई मुद्देपर राजने कानूनी सहारा लेकर करण जौहर को अगर कोर्ट में खींचा होता तो अच्छा था. धमकी देना गलत है. (उसी प्रकार उत्तर भारतीयों को पीटना भी गलत ही है.) राज ठाकरे विभाजनवादी मानसिकता फैला रहा है, यह सही है. लेकिन वह जो मुद्दे उठा रहा है उसे स्थानीय लोगों का समर्थन क्यों मिल रही है, यह भी देखना जरूरी है. इस में केंद्र की सरकारने भी ध्यान देना जरूरी है. मुंबई जैसे शहर में १९९१ से आज तक २ ५ लाख लोक युपी और बिहार से आए. स्वाभाविक है उन्ही के कारण स्थानीय मराठी लोगोंगा रोजगार छीना गया. राज को मिल रहा समर्थन उसी का परिणाम है. उस के अलावा बाकी भी कही सारे मुद्दे आगे आ रहे है. राज इन सभी मुद्दों का राजकीय करण कर रहा है, क्योंकी उसे उसकी पार्टी चलानी है. लेकीन यह मुद्दा दूर करने के लिए युपी व बिहार के विकास के लिए वहां की राज्य सरकारे तथा केंद्र सरकारने यथाशक्ती प्रयत्न करना जरूरी है. अगर वह हुआ तो राज की हवा जरूर कम हो जाएगी. http://www.misalpav.com/node/3655
ऐसे भडास मत निकालो
पता नही आप कौन हो। क्या हो? पर आपको मै इतना बतादूं के आपका नॉलेज काफी कम है। जब भी लिखो तो उस विषय को समझकर लिखना सिखो। मैं ना तो राज ठाकरे का समर्थन कर रहा हूं और ना तो आपका विरोध। आप मराठी हो या नही इसका मुझे पता नही है। पर महाराष्ट्र के बारे में आपका नॉलेज काफी कम है। यह आपके इस लेख से प्रतीत होता है। आप तो बस भडास निकाल रहे हो। राज ठाकरे जो कर रहे है। वह उनकी राजनीती है। लेकीन महाराष्ट्र में आज जो हालात है। उन हालात में राज का आंदोलन यशस्वी हो रहा है, इसके पिछे कुछ कारण है। आप जैसे दुसरे राज्य मे बैठे लोग चर्चा और छिंटाकशी के सिवाय कुछ नही कर सकते। महाराष्ट्र की गर बात करे तो आज महाराष्ट्र में बिहारी और बाहर से आने वाले लोगों का ताता लगा हूवा है। राज उन लोगों को विरोध नही कर रहे है। बिहार से आनेवाले गुंडों को राज का विरोध है। एक पागल हो सकता है, दस पागल हो सकते है, पर 100 पागल नही हो सकते। पुरा महाराष्ट्र आज राज के पिछे है। आपने कभी आपकी संस्कृतीका अपमान होते देखा है? नही ना? या तो आपकी कोई संस्कृती नही है। या तो अलग पहचान नही है। हम ‍सभ हिंदुस्तानी है, इसमें कोई दोराय नही। पर अलग-अलग संस्कृतीसेही यह हिंदुस्तान बना है। हमे अपना देश प्यारा है, पर संस्कृती भी प्यारी है। आपको ऑस्ट्रेलिया में जो हो रहा है उसका खेद है, पर महाराष्ट्र में जो बिहारी गुंडागर्दी चल रही है, उसका आपको कोई मलाल नही है? कैसे होगा? ना तो आपने ऑस्ट्रेलिया देखा है, ना तो महाराष्ट्र? आपने सिर्फ कहीं कुछ पढा है, बस आपकी राय बायस है। लेकीन हां, आपका लिखना शुरु रखीए, बस एक विनती है, लिखने से पहले आप जीस विषय पर लिख रहे है, उसे थोडा पढ लिजीएगा। उस विषयका अध्ययन करना। बहौत तरक्की करो गे।
ऐसे भडास मत निकालो
क्या आप यह केहरहेहैकि लोग दूसरे राज्योंमें जाकेर रोजगार ना करे. फिर इस तरह से मुंबई वाले दिल्ली भी न आए. मुंबई वालों को विदेश में जाकेर रोज़गार नही करना चहिये. उत्तर जरूर दिजियेगा.
राज ठाकरेने क्या गलत किया?
लोकतंत्रने हर भारतीय को कही भी रहने का और अपना पेट पालनेके लिये पैसे कमाने का पुरा हक दिया है. ये बात सबको मंजूर होनी चाहीये इसमे कोई शक नही. आज मुंबईमे देश के हर कोनेसे हर राज्‍य के लोग रहते है और काम करते है. उनके यहां रहने मे किसी को कोई परेशानी नही है. लेकीन जब आप पेट पालने के बहाने आकर यहॉं सत्ताधीश होने का गुंडज्ञगर्दी करने का काम शुरू कर देंगे तो कोई ये क्यो सहे. संजय निरुपम से लेकर अबू आजमी तक मुंबई मे हर दुसरा उत्तर भारतीय नेता रोज खडा होकर उत्तर भारतीयोंको तलवार बॉंटने की बात करता है. मुंबई मे टॅक्सी, रिक्षा चलानेवाले, दूध और सब्‍जी बेचनेवाले हे 'भैय्या' वहां के मराठी लोगोंकोही जब धमकाने लगे तो काई कैसे सहेगा. मुंबई मे आज गुजराती, बंगाली, पारसी, साऊथ इंडियन और पंजाबी भी रहते है. उनके मुंबई मे रहने के बारे मे कभी किसीने कुछ न ही कहा. क्योंकी उन्‍होने सिर्फ अपने काम से काम रखा. और मुंबई को और यहा के मराठी लोगोंको अपना माना. तो मराठीयोंने भी उन्‍हे पुरा प्‍यार दिया. वो आज जुबॉन से शायद ना हो लेकीन दिल से मराठी है. और उन्‍हे अपने आपको मराठी कहलाने मे गर्व होता है. ये बात सिर्फ मुंबई के लिये नही तो महाराष्‍ट्र छोड के दुसरे राज्योंमे रहने वाले मराठीयों को भी लागू होती है. जो जहॉं रहता है. वहॉं की संस्‍कृती और वहॉं के लोगों के साथ वो घुलमिल कर रहेगा तो उसे हर कोई अपना मानेगा. लेकीन जबसे ये बिहारी और उत्तर प्रदेश के गुंडे यहा आये है. मराठी लोगोंका जिना मुश्‍कील हो गया है. मुंबई मे गॅंग वॉर की, चोरी की, और लुट की घटनाओं के आकडे अगर आप देखेंगे तो यहॉं सबसे जादा लोग उत्तर प्रदेश और बिहार के मिलेंगे. वहा से तडीपार किये गये खून करके भागे हुये और भी बहुत सारे गुनहगार मुंबई मे आकर छुपते है. ये मुंबई को 'बिहार' बनायेंगे ये मराठी कैसे सह पायेगा. महाराष्‍ट्र मे आज रोजगार के अवसर ज्यादा है. मुंबई बडा और डेव्‍हलप्ड शहर है इसमे मराठी लोगोंकी क्या गलती. बिहार और उत्तर प्रदेश के नेताओंने 60 साल क्या किया. वहॉं रोजगार के अवसर क्यों नही मिल रहे. वहॉं तरक्की क्यों नही हो रही. ये उनसे कोई नही पुछता. वहॉं के राजनेताओंने सिर्फ गरीबोंका खून चुसने का काम किया है. उनके राज्योंको भूख, गोली और गरीबी के सिवा कुछ नही दिया. इसमे मुंबई के मराठीयोंकी क्या गलती. देश के सबसे ज्यादा पंतप्रधान उत्तर भारत से है फिर भी वहॉं तरक्की क्यो नही हुई. सालोंसे इस देश मे परिवारवाद चला रहे गांधी-नेहरू घराने के लोग उन्‍ही राज्‍योंसे चुन कर आते है न. तो उन्‍होंने अब तक वहॉं कुछ भी क्यों नही किया. इसके लिये क्या मराठी जिम्मेदार है. वहॉं के नेताओं को अपनी मूर्तीयॉं लगवाने और पार्कोके निर्माण मे करोडों की राशी खर्च करनेमे ही धन्‍यता लगती है. उन्‍हे क्यों नही पुछा जाता, की जिस दलित उध्‍दार के नाम पर गरीबोंको झांसा देकर उन्‍होने सत्ता हासिल की वो कहॉं है. सोनिया गांधी के रायबरेलीमे रेल कोच फॅक्टरी के लिये मायावतीने घिनौनी राजनिती के तहत विरोध क्यों किया इस बारे मे उसे क्यों नही पुछा जाता. दुनियाभर मे जहॉं तरक्की चल रही है वहॉं आज भी बंधुआ मजदूरी और भूखमरी क्यो चल रही है. इस बारे मे क्यों नही पुछा जाता. जबसे लालू के हात से रेल मंत्रालय गया है. आये दिन ट्रेन की बोगियोंमे आग जनी की घटनाये हो रही है. वो क्यो हो रही है और कौन करवा रहा है क्या हम और आप नही जानते. इसके बारे मे उन्‍हे कौन पुछेगा. एक जमाने मे जहॉं तक्षशीला और नालंदा जैसे विश्‍वविद्यालयोंने दुनिया को ग्यान का पाठ पढाया वहा पढाई बिचमेही छोडकर 8-10 साल के बच्‍चोंको काम पर क्यों लगा दिया जाता है. इसके लिये जिम्मेदार कौन ये क्यों नही पुछा जाता. क्या इन सब चिजों के लिये मराठी जिम्मेदार है. वहॉं के लोंगोंको पेट पालने के लिये दर-दर की ठोकरे खानी पडती है. इस बारे मे हमे खेद है. निश्चितही ये हमारे देश के लिये शर्म की बात है. उनका मुंबईमे आना और यहॉं आकर पेट पालने के लिये काम करने मे हमे कोई ऐतराज नही. लेकीन यहॉं आकर अन्‍य राज्योंके लोगोंकी तरह सादगी और शालीनतासे रहे तो हमे कोई आपत्ती नही. आये दिन लडकीयों को छेडना. गुंडागर्दी करना, रिक्षा और टॅक्सी चालकोंकी गुंडागर्दी हम कब तक सहेंगे. इन सब चीजोंमे इमेज तो मराठीयोंकीही खराब होनी है. रही बात राज ठाकरे की तो उन्‍होंने जो भी किया सालोंसे मराठीयों के मनमे दबी बात बाहर निकालने काम किया है. मै नही समझता कोई गलत बात है. आप को मराठी समझती है या नही मै नही जानता अगर समझती हो तो राज ठाकरे के विचारोंको एकबार समझने की कोशिश किजीये. यों छत्रपती शिवाजी महाराज और बाल गंगाधर तिलक का नाम लेकर मानवता की दुहाई देने के अलावा अगर आप तथ्‍थोंका समझेंगे तो ज्यादा अच्‍छा होगा. और उत्तर प्रदेश और बिहारींयोंको केवल महाराष्‍ट्र मे ही नही. कर्नाटक, गुजरात और आसाम मे भी विरोध होता है. वहॉं क्यो आप कुछ बोलते नही. राज ठाकरेने समस्‍त उत्तर भारतीयोंके खिलाफ नही अपितु गुंडागर्दी करनेवाले उत्तर प्रदेश और बिहारीयोंके खिलाफ आंदोलन चलाया है. हिंदी माध्‍यमों की अधुरी सोच ने उसे उत्तर भारत और हिंदी के खिलाफ आंदोलन का नाम दिया. रही बात खबरोंकी तो आंदोलन को हिंदी और उत्तर भारत के खिलाफ होने का नाम देने के बाद निरपेक्ष खबरोंकी अपेक्षा करनाही बेकार है.
ऐसे भडास मत निकालो।
नही मेरे कहने का मतलब यह नही है। आज काफी सारे बंगाली, गुजराती, पंजाबी मुंबई में है। राज उन्हे कुछ क्यो नही कहते? क्योंकी मराठी संस्कृती को वो उतनाही मान सन्मान देते है, जीतना के अपने संस्कृती को। बिहारी यह नही करते। और गर आपके पहचान का कोई पुलिसवाला महाराष्ट्र में है, तो उसे पुछकर देखो पिछले कुछ दिनों में कितने बंगाली, पंजाबी, गुजराती और बिहारी गुंडे पकडे है। लुटेरे पकडे है। आपको आपके प्रश्न का उत्तर अपने आप मिल जाएगा।
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
थंक्स hi sachin how r u? i m Prabodh Kumar Deo a maharashtrian living in dubai since 15 years.I proud that i m maharashtrian ,swayamsevak of RSS.But now these days what type of things r happend in india and the so called intuacutal are leading this type of nonsence happing. Jitan aap khula dayra rakho ge utne he aap aage badoge anyatha sankirnta aap ki khatam kar degi. once again thanks for a briliant wrting.we only do the prayer to god to give some SADBHUDDHI to this type of leaders and their followers that pl idol SEA not small rivers. Regards Prabodh kumar Deo-Dubai(UAE)
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
Pramod ji, aap Dubai me baithakar maharashtra ya bharat ke bare me kuchh na hi bole to behtar hoga....
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
अगर एक नेता को एटना ही फिक्र है महाराष्ट्र कि तो जाए जरा लालू और मुलायम और मायावती से आमने सामने लदायि करे और एक आम आदमी को मार रहे है ....................
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
Hukmaraan-e-Hind-कर ही क्या सकते थे हुक्मरान-ए-हिंद; खांस लेने के सिवाय ? Shab-e-Tareek thee, Dahshatgard Wahshee Darindey phir aa gayey, Qatl-o-Gaarad kar, Asmet-e-Dukhtaraan Kamsin tak wo ley gayey. Kar hee kyaa saktey they Hukmaraan-e-Hind; Khaans leyney ke siwaay ? शब्-ए-तारीक थी, दहशतगर्द वहशी दरिन्दे फिर आ गये , क़त्ल -ओ -गारद कर , अस्मत-ए-दुख्तरान कमसिन तक वो ले गये. कर ही क्या सकते थे हुक्मरान-ए-हिंद; खांस लेने के सिवाय ? English Translation : It was full moon night. Terrorist Insane Devils came again. After indiscriminate murdering of innocents, raped the pre-puberty age small girls, too. What else The Rulers of India could do except "Coughing", to inform of their presence ? ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ Be-Gairat, Be-Imaan, Haraam-khoron ko miltee Azeem Sazaa, Naa-Mardee Khuda ney bakshee, to kyaa; 'Maar Maar' to Kiyae Jaa. बे-गैरत ,बे-ईमान ,हराम-खोरों को मिलती अज़ीम सज़ा , नामरदी खुदा ने बक्शी, तो क्या ; 'मार मार' तो किये जा . English Translation : Devoid of self-respect, devoid of conscience - Human Parasites get Paramount Punishment; The Impotency, awarded by God for Paramount Crimes. You (Impotent Indian Rulers) can shout; at least - 'Kill them Kill them'
Re: मराठी नहीं है राज ठाकरे..!!
लोकतंत्रने हर भारतीय को कही भी रहने का और अपना पेट पालनेके लिये पैसे कमाने का पुरा हक दिया है. ये बात सबको मंजूर होनी चाहीये इसमे कोई शक नही. आज मुंबईमे देश के हर कोनेसे हर राज्‍य के लोग रहते है और काम करते है. उनके यहां रहने मे किसी को कोई परेशानी नही है. लेकीन जब आप पेट पालने के बहाने आकर यहॉं सत्ताधीश होने का गुंडज्ञगर्दी करने का काम शुरू कर देंगे तो कोई ये क्यो सहे. संजय निरुपम से लेकर अबू आजमी तक मुंबई मे हर दुसरा उत्तर भारतीय नेता रोज खडा होकर उत्तर भारतीयोंको तलवार बॉंटने की बात करता है. मुंबई मे टॅक्सी, रिक्षा चलानेवाले, दूध और सब्‍जी बेचनेवाले 'भैय्या' वहां के मराठी लोगोंकोही जब धमकाने लगे तो कोई कैसे सहेगा. मुंबई मे आज गुजराती, बंगाली, पारसी, साऊथ इंडियन और पंजाबी भी रहते है. उनके मुंबई मे रहने के बारे मे कभी किसीने कुछ न ही कहा. क्योंकी उन्‍होने सिर्फ अपने काम से काम रखा. और मुंबई को और यहा के मराठी लोगोंको अपना माना. तो मराठीयोंने भी उन्‍हे पुरा प्‍यार दिया. वो आज जुबॉन से शायद ना हो लेकीन दिल से मराठी है. और उन्‍हे अपने आपको मराठी कहलाने मे गर्व होता है. ये बात सिर्फ मुंबई के लिये नही तो महाराष्‍ट्र छोड के दुसरे राज्योंमे रहने वाले मराठीयों को भी लागू होती है. जो जहॉं रहता है. वहॉं की संस्‍कृती और वहॉं के लोगों के साथ वो घुलमिल कर रहेगा तो उसे हर कोई अपना मानेगा. लेकीन जबसे ये बिहारी और उत्तर प्रदेश के गुंडे यहा आये है. मराठी लोगोंका जिना मुश्‍कील हो गया है. मुंबई मे गॅंग वॉर की, चोरी की, और लुट की घटनाओं के आकडे अगर आप देखेंगे तो यहॉं सबसे जादा लोग उत्तर प्रदेश और बिहार के मिलेंगे. वहा से तडीपार किये गये खून करके भागे हुये और भी बहुत सारे गुनहगार मुंबई मे आकर छुपते है. ये मुंबई को 'बिहार' बनायेंगे ये मराठी कैसे सह पायेगा. महाराष्‍ट्र मे आज रोजगार के अवसर ज्यादा है. मुंबई बडा और डेव्‍हलप्ड शहर है इसमे मराठी लोगोंकी क्या गलती. बिहार और उत्तर प्रदेश के नेताओंने 60 साल क्या किया. वहॉं रोजगार के अवसर क्यों नही मिल रहे. वहॉं तरक्की क्यों नही हो रही. ये उनसे कोई नही पुछता. वहॉं के राजनेताओंने सिर्फ गरीबोंका खून चुसने का काम किया है. उनके राज्योंको भूख, गोली और गरीबी के सिवा कुछ नही दिया. इसमे मुंबई के मराठीयोंकी क्या गलती. देश के सबसे ज्यादा पंतप्रधान उत्तर भारत से है फिर भी वहॉं तरक्की क्यो नही हुई. सालोंसे इस देश मे परिवारवाद चला रहे गांधी-नेहरू घराने के लोग उन्‍ही राज्‍योंसे चुन कर आते है न. तो उन्‍होंने अब तक वहॉं कुछ भी क्यों नही किया. इसके लिये क्या मराठी जिम्मेदार है. वहॉं के नेताओं को अपनी मूर्तीयॉं लगवाने और पार्कोके निर्माण मे करोडों की राशी खर्च करनेमे ही धन्‍यता लगती है. उन्‍हे क्यों नही पुछा जाता, की जिस दलित उध्‍दार के नाम पर गरीबोंको झांसा देकर उन्‍होने सत्ता हासिल की वो कहॉं है. सोनिया गांधी के रायबरेलीमे रेल कोच फॅक्टरी के लिये मायावतीने घिनौनी राजनिती के तहत विरोध क्यों किया इस बारे मे उसे क्यों नही पुछा जाता. दुनियाभर मे जहॉं तरक्की चल रही है वहॉं आज भी बंधुआ मजदूरी और भूखमरी क्यो चल रही है. इस बारे मे क्यों नही पुछा जाता. जबसे लालू के हात से रेल मंत्रालय गया है. आये दिन ट्रेन की बोगियोंमे आग जनी की घटनाये हो रही है. वो क्यो हो रही है और कौन करवा रहा है क्या हम और आप नही जानते. इसके बारे मे उन्‍हे कौन पुछेगा. एक जमाने मे जहॉं तक्षशीला और नालंदा जैसे विश्‍वविद्यालयोंने दुनिया को ग्यान का पाठ पढाया वहा पढाई बिचमेही छोडकर 8-10 साल के बच्‍चोंको काम पर क्यों लगा दिया जाता है. इसके लिये जिम्मेदार कौन ये क्यों नही पुछा जाता. क्या इन सब चिजों के लिये मराठी जिम्मेदार है. वहॉं के लोंगोंको पेट पालने के लिये दर-दर की ठोकरे खानी पडती है. इस बारे मे हमे खेद है. निश्चितही ये हमारे देश के लिये शर्म की बात है. उनका मुंबईमे आना और यहॉं आकर पेट पालने के लिये काम करने मे हमे कोई ऐतराज नही. लेकीन यहॉं आकर अन्‍य राज्योंके लोगोंकी तरह सादगी और शालीनतासे रहे तो हमे कोई आपत्ती नही. आये दिन लडकीयों को छेडना. गुंडागर्दी करना, रिक्षा और टॅक्सी चालकोंकी गुंडागर्दी हम कब तक सहेंगे. इन सब चीजोंमे इमेज तो मराठीयोंकीही खराब होनी है. रही बात राज ठाकरे की तो उन्‍होंने जो भी किया सालोंसे मराठीयों के मनमे दबी बात बाहर निकालने काम किया है. मै नही समझता कोई गलत बात है. आप को मराठी समझती है या नही मै नही जानता अगर समझती हो तो राज ठाकरे के विचारोंको एकबार समझने की कोशिश किजीये. यों छत्रपती शिवाजी महाराज और बाल गंगाधर तिलक का नाम लेकर मानवता की दुहाई देने के अलावा अगर आप तथ्‍थोंका समझेंगे तो ज्यादा अच्‍छा होगा. और उत्तर प्रदेश और बिहारींयोंको केवल महाराष्‍ट्र मे ही नही. कर्नाटक, गुजरात और आसाम मे भी विरोध होता है. वहॉं क्यो आप कुछ बोलते नही. राज ठाकरेने समस्‍त उत्तर भारतीयोंके खिलाफ नही अपितु गुंडागर्दी करनेवाले उत्तर प्रदेश और बिहारीयोंके खिलाफ आंदोलन चलाया है. हिंदी माध्‍यमों की अधुरी सोच ने उसे उत्तर भारत और हिंदी के खिलाफ आंदोलन का नाम दिया. रही बात खबरोंकी तो आंदोलन को हिंदी और उत्तर भारत के खिलाफ होने का नाम देने के बाद निरपेक्ष खबरोंकी अपेक्षा करनाही बेकार है. ------------ मराठी भाषकाची हिंदी
अस्वीकरण