सर्वेक्षण : कैटलिन आर्कटिक सर्वे के अनुसार आने वाले वर्षो में मौसम में होने वाले परिवर्तनों से तापमान, समुद्री हवाओं और विशेषकर बर्फ के जमने के ढर्रे में भारी परिवर्तन आएगा। यहाँ तक कि अगले 10 से 20 वर्षों के भीतर आर्कटिक सागर गर्मियों में बर्फ रहित हो जाएगा। इसकी वजह से अल्पकाल में आर्कटिक सागर में जहाजों की आवाजाही बढ़ेगी, गैस और तेल के स्रोत उपलब्ध होंगें। पर दीर्घ काल में इसके नकारात्मक प्रभाव सामने आएँगें। पृथ्वी का तापमान बढ़ेगा, समुद्र और उसके वातावरण में भारी बदलाव देखने में आएँगे और जल में अम्लीकरण बढ़ेगा। रिपोर्ट तैयार करने वाले वैज्ञानिक पेन हैडो का कहना है कि उन्हें इस बात से काफी सदमा पहुँचा है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में देखा है कि किस तरह से अन्तरिक्ष से पृथ्वी अब कितना बदली हुई नजर आती है।
इसी विषय पर और भी अन्य शोध हुए हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि आर्कटिक की बर्फ अगले दशक भर के अंदर पिघल जाएगी। इसे यहाँ पढ़ा जा सकता है।
Alarm bells from the Arctic
A recent WWF-sponsored survey shows that Arctic sea ice is melting faster than expected and that the North Pole will be largely ice-free during summer months within 10 years. This should set alarm bells ringing! Climate change is not something that will happen in some distant future or on some distant land. It is on our doorsteps and we need to take action now.
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