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  श्रेणियाँ > विचार पृष्ठ  (22)

इसमें जो कुछ भी तात्कालिक घट रहा है उस परिप्रेक्ष्य में अपने विचार आप लोगों के समक्ष रखूंगा। मैं चाहूंगा कि इन विचारों में तीखापन हो....आपके समर्थन की अपेक्षा भी रहेगी......मुझे लगता है, अब समय आ गया है कि हिन्दी में लिखे विचार भी विश्वभर में अपनी आभा ...

• क्या विकास का मतलब सिर्फ महानगर हैं?-भाग-2

देश में गाँव और छोटे शहर अभी भी हैं उपेक्षा का शिकार

तो दोस्तों, अपनी बात हो रही थी भारत के असल को लेकर यानी गाँवों और छोटे शहरों को लेकर..............और उनमें हो रही तरक्की को लेकर.......तो बड़े शहरों को देश का इस मायने में आईना माना जा सकता है कि दुनिया में किसी भी देश के कुछ मुख्य शहर ही अपनी पहचान बना ...   और पढ़ें...
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• क्या विकास का मतलब सिर्फ महानगर हैं?-भाग-1

देश में गाँव और छोटे शहर अभी भी हैं उपेक्षा का शिकार

आजकल टीवी पर विज्ञापनों का दौर चल रहा है, अलग-अलग कार्यक्रमों का दौर भी चल रहा है, भारत के सशक्त ३५ करोड़ लोगों के मध्यमवर्ग के यहाँ दर्शन हो रहे हैं (उसी मध्यमवर्ग के जिसके अच्छा खाने से आजकल अमेरिका को पेट में दर्द हो रहा है)........तो टीवी पर और उसके ...   और पढ़ें...
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• तुम्हें लानत है चीन!

तिब्बत को कुचलकर सभ्य दुनिया का खात्मा चाहता है यह लाल देश

तो चीन में होने वाले ओलंपिक खेलों (जो अगस्त में बीजिंग में होने जा रहे हैं) के विरोध की मशाल उसके ही एक शहर हांगकांग में भी जल रही है......यही नहीं वहाँ तिब्बत के झंडे भी बनते हुए पकड़े गए जिन्हें चीन के साम्राज्यवादी रवैए के खिलाफ होने वाले विरोध ...   और पढ़ें...
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• दुनिया को भूखा देखना चाहता है अमेरिका!

राइस का बयान शर्मनाक और अमेरिकी सोच की पोल खोलने वाला है

महाबली अमेरिका की विदेश मंत्री सुश्री कोंडेलिसा राइस अश्वेत होने के बावजूद पगला गई हैं। आज ही उनका हाहाकार मचाने वाला ताजा बयान आया है............वे कहती है कि विश्व में खाद्यान्न संकट के लिए भारत और चीन जिम्मेदार हैं। भारत इसलिए कि यहाँ लोगों की खुराक ...   और पढ़ें...
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• युवाओं के सामने मुंह फैलाए खड़ा अपराध

बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई का फायदा उठा रही है आपराधिक दुनिया

मैं आजकल जिस शहर में रह रहा हूँ उसे लोग काफी वर्षों से एक शांत शहर मानते आ रहे थे। यहाँ तक की यह क्षेत्र भी काफी शांत माना जाता है............मेरे वर्तमान शहर का नाम इंदौर है और क्षेत्र का नाम मालवा......तो मालवा की मिट्टी को लोग यहाँ के मौसम की तरह शांत ...   और पढ़ें...
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• बढ़ती महंगाई और सरकारी पैंतरे

नेता मानते हैं कि जनता जल्दी भूल जाती है

देश में मुद्रास्फीती की दर स्पेन के सांडों की तरह दौड़ रही है......आम आदमी की बढ़ती महंगाई से कमर टूट रही है..........दूध और पेट्रोल के साथ पानी भी महंगा हो रहा है.......दालें और सब्जियाँ खाना आम आदमी के लिए बादाम और पिश्ते खाने जैसा हो रहा है जबकि बादाम ...   और पढ़ें...
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• उत्तर आधुनिकतावाद और विखंडन का सिद्धांत

अब संसार का समाज किसी को बड़ा नहीं बनने देगा

आप लोगों से कई दिनों बाद रूबरू हो रहा हूँ...........खैर१९८...   और पढ़ें...
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• हिंदी मीडिया का नया आयाम लेकिन व्यवसायिकता की कमी - भाग दो

न्यूजपेपर इंडस्ट्री को इंडस्ट्री बनने में अभी भी समय है

तो दोस्त लोगों बात हो रही थी मीडिया की.......खासकर हिन्दी मीडिया की......तो देश में बड़े हिन्दी अखबार के ग्रुप लगभग दस हैं.....तो मतलब हमारे पास आप्शन भी इतने ही हुए.....वहीं दूसरे सेक्टर्स में कंपनियों की संख्या कई हजारों में है और वह भी बड़े साइज की ...   और पढ़ें...
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• हिंदी मीडिया का नया आयाम लेकिन व्यवसायिकता की कमी - भाग एक

बड़ी घोषणाओं के बाद भी काफी अखबार टांय-टांय फिस्स बोल जाते हैं

कल देश के कुछ बड़े हिन्दी अखबारों में से एक दैनिक भास्कर के डॉयरेक्टर (मार्केटिंग) गिरीश अग्रवाल की कही बात पढ़ रहा था.....कि देश में आने वाले समय में बहुत से पत्र-पत्रिकाएँ आ रहे हैं इसका मीडिया जगत को जबरदस्त फायदा मिलेगा........फिर कुछ दिन पहले (एक माह ...   और पढ़ें...
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• क्या संसार का समाज वहशी होता जा रहा है?

छोटी-छोटी बच्चियों को भी यौन प्रताड़ना देने से बाज नहीं आ रहे लोग..

आज दो खबरें पढ़ीं.....पढ़कर मन खट्टा हो गया.......पहली थी कि दुनिया भर में गुरू यानी किसी स्कूल या कॉलेजों में पढ़ाने वाले अध्यापक गुरू दक्षिणा के रूप में अपनी छात्राओं से किसी ना किसी प्रकार यौन सुख की अपेक्षा रखते हैं.......कई मामलों में ये सफल भी हो ...   और पढ़ें...
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